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श्योपुर में आखिरी सफर पर भी नसीब नहीं रास्ता, घुटनों तक पानी में निकली महिला की अंतिम यात्रा

श्योपुर जिले के सहसराम ग्राम पंचायत से एक तस्वीर सामने आई है, जो विकास के खोखले दावों की हकीकत बयां कर रही है. बीते दिन ग्राम सहसराम के निवासी उमाकांत अवस्थी की माताजी का निधन हो गया. अंतिम संस्कार के लिए जब गांव के लोग शवयात्रा लेकर निकले तो उन्हें घुटनों तक पानी और कीचड़ से भरे रास्ते से गुजरना पड़ा. ग्राम सहसराम में सड़क और नाली निर्माण जैसे बुनियादी काम केवल कागजों में पूरे होते दिखते हैं.

हालात यह हैं कि बारिश के दिनों में पूरा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, लेकिन ग्राम पंचायत के जिम्मेदार सरपंच, सचिव और अधिकारी इस और ध्यान नहीं दे रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता जर्जर है, लेकिन पंचायत में बैठे जिम्मेदारों को बस भ्रष्टाचार की योजनाओं में हिस्सा चाहिए। पुलिया निर्माण हो या सड़क मरम्मत, हर काम में गड़बड़ी और कमीशनखोरी के किस्से आम हो चुके हैं. अफसोस की बात यह है कि अंतिम यात्रा जैसी संवेदनशील परिस्थिति में भी ग्रामीणों को घुटनों तक पानी में चलकर अपनों को विदा करना पड़ा.

ग्रामीण बताते हैं कि कई बार अधिकारियों को लिखित में शिकायत दी गई, लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द रास्ते की मरम्मत और समुचित ड्रेनेज व्यवस्था नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे.

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