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कै रूपसिंह स्टेडियम क्या जीडीसीए के हाथ से जायेगा?

ग्वालियर  कै. रूप सिंह स्टेडियम की लीज का संकट गहरा गया है, अब पुनः ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन ने कै. रूप सिंह स्टेडियम की लीज 30 साल के लिये पुनः मांगी है, लेकिन एमआईसी इसकी लीज जीडीसीए को पुनः करने के पक्ष में नहीं है। वहीं पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर व वर्तमान सांसद भारत सिंह कुशवाह भी जीडीसीए की लीज बढ़ाये जाने के पक्ष में नहीं है। इन नेताओं का मानना है कि कै. रूप सिंह स्टेडियम जीडीसीए को दिये जाने से यहां क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों का राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर आयोजन नहीं हो पाता है। 
ज्ञांतव्य है कि ग्वालियर के प्रसिद्ध कै. रूप सिंह स्टेडियम 1995 में जीडीसीए को 30 वर्षों के लिये लीज पर दिया गया था। जिसकी अवधि बीते जुलाई माह 2025 में समाप्त हो चुकी है। लेकिन अभी भी कै. रूप सिंह स्टेडियम पर जीडीसीए का कब्जा बरकरार है। अब नगर निगम इसे वापस लेना चाहता हैं, लेकिन जीडीसीए इसे छोड़ना नहीं चाहता। इसी कारण निगम की महापौर डा. शोभा सतीश सिकरवार सहित परिषद में बहुमत प्राप्त कांग्रेस पार्षद दल व एमआईसी कै. रूपसिंह स्टेडियम की लीज पुनः जीडीसीए के पक्ष में नहीं करना चाहते हैं। इन सभी का तर्क है कि जीडीसीए को कै. रूपसिंह स्टेडियम दिये जाने से यह केवल क्रिकेट तक सीमित हो गया है। यहां हाकी, फुटबाल, कुश्ती जैसे आयोजन नहीं हो पा रहे हैं। एमआईसी का तर्क यह भी है कि इस स्टेडियम ने देश को हाकी में कई स्टार ओलंपियन दिये है। अतः इसे सभी खेलों के लिये खोला जाये, जिससे कै. रूपसिंह स्टेडियम में सभी खेलों की गतिविधियां संचालित होते रहे। वहीं जीडीसीए ने कै. रूपसिंह स्टेडियम पर अपनी लीज बढ़ाये जाने को लेकर जुलाई में ही आवेदन कर दिया है। 
जीडीसीए से जुड़े लोगों का कहना है कि कै. रूपसिंह स्टेडियम को क्रिकेट आयोजन से विश्वभर में पहचान मिली है। यहां मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदूलकर ने डबल सेंचुरी भी बनाई थी। यहां जीडीसीए नवोदित किक्रेट खिलाड़ियों को ट्रेंड भी करता है, जिससे क्रिकेट प्रतिभायें सामने आ रही है। इसीलिये इसकी लीज जीडीसीए को पुनः होनी चाहिये। कुल मिलाकर जीडीसीए की लीज न बढ़ने से जीडीसीए के आयोजन भी अधर में लटक गये हैं। केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की टीम द्वारा इस संदर्भ में सभी जिम्मेदारों से बात कर अपना पक्ष रखा गया है। वहीं महापौर डा. शोभा सतीश सिकरवार से भी बात कर जीडीसीए के पक्ष में बात कहीं गई है ।

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