प्रेम विवाह की तालिबानी सज़ा मौत, प्रशासन सुस्त नशा मुक्ति केन्द्र मस्त, झुलेलाल महोत्सव का समापन आज, गणेश प्रतिमाओं का नियम विरुद्ध निर्माण
एक प्रेमी युगल को प्रेम विवाह करना इतना भारी पड गया कि एक साल बाद जब वे अपने गाँव पहुंचे तो लड़की के घरवालों ने उसी। के सामने उसके पति की इतनी पिटाई की के पति की मौत हो गई। यह पूरी घटना 19 अगस्त के रात की है जब लाठी डंडों से दामाद को घेरकर पीटा गया। बेलगढ़ा थाना क्षेत्र के हरसी निवासी ओम प्रकाश बाथम ने एक साल पहले शिवानी झा। से घर से भाग कर प्रेम विवाह किया था और वह डबरा और शिवपुरी। में रहकर मजदूरी करके गुजारा कर रहा था। उसे लगा के एक साल बाद सब कुछ सामान्य हो गया होगा इसलिए वह गांव वापस पहुंचा लेकिन वहाँ यह घटना हो गई। ओमप्रकाश की मौत के बाद गाँव में तनाव है। उसके परिजन आक्रोशित हैं।हालांकि लड़की की शिकायत पर लड़की के ही पिता और परिजनों पर एफआईआर दर्ज हो गई है।
नशा मुक्ति केन्द्र में दो मौत होने के बाद भी जिला प्रशासन इन। केंद्रों की जांच में गंभीरता नहीं दिखा रहा है। संस्कार मुक्ति। केंद्र में बैंक अधिकारी पंकज शर्मा की मौत के मामले में दोनों आरोपी विशाल कांकर और हर्ष शिंदे अभी फरार है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो ग्वालियर में बीस नशा मुक्ति केंद्र संचालित है जिसमें से बारह अवैध है और जो अन्य चल रहे हैं उसमें भी कितना काम नियमानुसार चल रहा है इस बारे में प्रशासन पर कोई जानकारी नहीं है। एसडीएम स्तर पर जांच टीम बनाई गई है लेकिन इसके बावजूद कोई बड़ी कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है। नशा मुक्ति केंद्र प्रशासनिक अनदेखी के चलते मौत के केंद्र बन चुके हैं।
सातऊं की बेशकीमती जमीन के मामले में एक बार फिर शासन द्वारा पक्ष न रखने के चलते कोर्ट। ने पक्षकार के पक्ष में इस्तीफे दे दिया है शासकीय अधिवक्ता की ओर से पक्ष ही पेश नहीं किया गया। ग्राम सातों में पटवारी हल्का नंबर 73 राजस्व निरीक्षक मंडल 3 घाटी गाँव में एक बीघा जमीन है। इस जमीन को 2013 में क्रय किया था। यह जमीन करतार सिंह से ली थी वादी। ने अपने आवेदन में बताया है विवाद गृत भूमि पर प्रतिवादी गण। मध्य प्रदेश शासन द्वारा कलेक्टर तहसीलदार आपस में सांठगांठ करते हुए वादी। को अवैध और बल पूर्वक बेदखल करना चाहते हैं। इस मामले में प्रतिवादी गण एक पक्षीय होने से उनकी ओर से जवाब अभिलेख प्रस्तुत नहीं हुआ कोर्ट ने परिस्थितियों के आधार पर मामला वादी के पक्ष में होना पाया।
