ग्वालियर बन गया नरक! ‘इट इज एक्ट ऑफ गॉड”
ग्वालियर की सड़कों पर निकलते समय सहसा कभी न कभी तो आपके मुंह से निकल ही जाता होगा “ओह माई गॉड”….. मुंह से निकला यह ओह माई गॉड याद दिलाता है परेश रावल अभिनेत्री फिल्म ओह माई गॉड की जिसमें उन्होंने एक नास्तिक कानी लाल जी मेहता का किरदार निभाया था। गुजरात के एक नाटक कांजीव कांजी से प्रेरित यह फिल्म शिक्षा पद्धति और व्यवस्था पर एक चोट थी। इस फिल्म की लम्बी बात नहीं करेंगे लेकिन बात करेंगे उसी व्यवस्था की जिससे ग्वालियर के रहवासी आज परेशान हैं। ग्वालियर में ऐसे सैकड़ों हजारों या कहीं लाखों कानीलालजी मेहता घूम रहे हैं। जिनके पास ओ माई गॉड कहने के अलावा कोई चारा नहीं।
मामला है ग्वालियर की ऊबड़ खाबड़ सत्यानाश सड़कों का जहां सड़क कम घटे ज्यादा हैं सड़क पर चलना दूभर है तमाम एक्सीडेंट हो रहे हैं लोगों की गाड़ियां खराब हो रही हैं और इन सब सड़कों के इस जर्जर हालात का दोषी कौन है यह खोज जब शहर में मीडिया ने भी की खूब खबरें चली तो कुछ समय तक ऐसा लगा कि कोई न कोई इंसान तो जिम्मेदार होगा जिसकी वजह से यह जर्जर सड़कों का दर्द जनता को भोगना पड़ रहा है। लेकिन यकीन मानिए महीनों बाद भी अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि शहर के किस बदहाल हालत का दोषी कौन है? ऐसी कौन सी वजह के इस शहर की सारी व्यवस्थाएं चौपट हो चुकी हैं।
अभी हाल ही में कलेक्टेड कार्यालय में दिशा की बैठक थी जिसकी अध्यक्षता सांसद भारत सिंह कुशवाह ने की शहर के तमाम कार्यों पर चर्चा हुई। बैठक होती ही चर्चा के लिए है तो इस बात में कोई कौतूहल की बात नहीं कि बैठक हुई तो चर्चा हुई होगी। चर्चा के बाद जब पत्रकारों ने सांसद भारत सिंह कुशवाहा से प्रश्न किए और उन्होंने शहर की बदहाली के बारे में जानना चाहा। तो सांसद भारत सिंह कुशवाहा ने शहर की पूरी जर्जर सड़कों का ठीक रहा अति वर्षा के सर मड़ दिया अब बारिश किसने की बारिश तो भगवान ही कराएंगे। इंसान के बस की तो है नहीं तो भगवान ने ज्यादा बारिश करा दी।इसलिए सड़कों की हालत खराब हुई इसका मतलब है कि शहर के जर्जर खस्ताहाल सड़कों का दोषी भगवान है क्योंकि यह अति वर्षा के कारण हुआ है तो अति वर्षा एक्ट ऑफ गॉड है।
