PhD करना चाहते हैं तो जान लें AICTE के ये नए नियम,
यदि आप इंजीनियरिंग या टेक्निकल कोर्स में पीएचडी करने के योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) इस प्रोग्राम से संबंधित नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। जिसकी जानकारी अभ्यर्थियों को होनी चाहिए। एआईसीटीए ने एक बेंगलुरू यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर वेणु गोपाल की अध्यक्षता में टास्क फोर्स का का गठन किया था। जिसने कई नए नियमों का प्रस्ताव रखा गया है।
इस प्रस्ताव को अभी भी शिक्षा मंत्रालय की ओर से मंजूरी प्राप्त करने की जरूरत है। इसके बाद ही नए नियम लागू हो पाएंगे। टास्क फोर्स ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि स्टूडेंट्स 2.5 साल में पीएचडी यानि थीसिस पूरा कर सकते हैं और अपने रिसर्च को किसी प्रतिष्ठित जर्नल में पब्लिश करवा सकते हैँ। हालांकि यह सुविधा उन उम्मीदवारों को मिलेगी, जो स्कोपस- सूचीबद्ध Q1 जर्नल में अपने लेख प्रकाशित करेंगे। सामान्य तौर पर पीएचडी की अवधि 3 से 6 वर्ष होती है।
ये काम होगा अनिवार्य (PHD New Rules)
नए नियमों के तहत शोधार्थियों के लिए अपने लेखन को जनरल में पहले और संवाददाता लेखक के रूप में प्रकाशित करना होगा। लेख उनके शोध प्रबंध पर ही आधारित होंगे। टास्क फोर्स का मानना है कि शोधार्थियों के लिए पत्रिकाओं में अपने लिए प्रकाशित करना बेहद जरूरी है। ताकि वे ब्लिकेशन प्रक्रिया के जरिए अगले स्तर के छात्रों का मार्गदर्शन कर सकें।हालांकि यूजीसी मैगजीन में लेख प्रकाशित करना अनिवार्य नहीं करता। कर्स के दौरान दो विश्वविद्यालय में माइग्रेट होने की अनुमति भी होगी।
AI से जुड़े नियमों को भी जान लें
रिसर्च में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। अब रिसर्च फेलो को अपने पब्लिकेशन में एआई कंटेंट के परसेंटेज को का खुलासा करना होगा। केवल 20% एआई कंटेन्ट की अनुमति होगी। इसके अलावा कॉपीराइट स्टेटमेंट, संदर्भ और साहित्य की चोरी की जांच भी जरूरी होगा। टास्क फोर्स ने रिपोर्ट जुलाई 2025 में पेश की थी।
