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MP में आदिवासी शोषण मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, कहा “सरकारी दावों की पोल खुली

आदिवासी किसानों के कथित शोषण, जमीन हड़पने और बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा एसआईटी की जांच पर उठाए गए सवालों के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणी ने सरकार के दावों की वास्तविकता उजागर कर दी है और यह स्पष्ट हो गया है कि आदिवासियों के साथ हुए अन्याय को दबाने का प्रयास किया गया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि आदिवासियों के शोषण पर हाईकोर्ट की टिप्पणी ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईटी की रिपोर्ट सच्चाई सामने लाने के बजाय उस पर पर्दा डालने का काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि आदिवासी किसानों की जमीन दबाव बनाकर बिकवाने, बंधुआ मजदूरी और शोषण जैसे गंभीर मामलों में जमीनी स्तर पर जांच करने के बजाय एसी कमरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार की गई, जिस पर अब हाईकोर्ट ने भी सवाल खड़े किए हैं।

क्या है मामला

ग्वालियर हाईकोर्ट खंडपीठ ने आदिवासी किसानों के कथित शोषण और बंधुआ मजदूरी की जांच कर रही एसआईटी की रिपोर्टों पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने जमीनी स्तर पर तथ्य जुटाने के बजाय विभागों के बीच हुए पत्राचार के आधार पर रिपोर्ट तैयार की। कोर्ट ने इसे सच्चाई उजागर करने के बजाय मामले पर पर्दा डालने का प्रयास बताया।

यह मामला एक आदिवासी की याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया था कि अशोकनगर, गुना और श्योपुर सहित कई जिलों में आदिवासी किसानों को प्रभावशाली लोगों द्वारा कथित रूप से दबाव में रखकर उनकी जमीनों के सौदे कराए गए और उन्हें बंधुआ मजदूरी जैसी परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया गया। इसी के बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी, जिसकी कार्यप्रणाली पर अब हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

इस मामले को लेकर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरते हुए कहा है कि आदिवासियों के शोषण पर हाईकोर्ट की टिप्पणी ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि एसआईटी की रिपोर्ट सच्चाई उजागर करने के बजाय उस पर पर्दा डालने का काम कर रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद का स्पष्ट मानना है कि आदिवासियों के साथ हुए अन्याय को सिर्फ कागजी कार्रवाई के माध्यम से दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यापक जांच कर दोषियों को जवाबदेह बनाने की मांग की है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन और सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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