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राममंदिर चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट SIT ने सरकार को सौंपी 20 पेज की रिपोर्ट में FIR और ट्रस्ट को दोबारा गठित करने की सिफारिश

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने मंगलवार को अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी। सूत्रों के मुताबिक, इसमें FIR दर्ज करने और ट्रस्ट को दोबारा गठित करने की सिफारिश की गई है। किसी सीनियर अफसर को मंदिर का CEO नियुक्त करने का भी सुझाव है। डिटेल जांच के लिए SIT ने और समय मांगा है।

रिपोर्ट गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को रिपोर्ट सौंपी गई है। टीम ने बताया कि 20 पन्नों की यह शुरुआती रिपोर्ट है। इसमें 150 लोगों से पूछताछ की डिटेल है।

सूत्रों के मुताबिक, SIT ने पिछले 5 साल के चढ़ावे का ऑडिट कराने की भी सिफारिश की है। चढ़ावे में अनियमितता रोकने के लिए सुझाव दिए हैं। ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी। इसके बाद गृह मंत्रालय तय करेगा कि ट्रस्ट के किन सदस्यों को रखा जाए या हटाया जाए।

राम मंदिर चोरी मामले में 5 आरोपियों लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर 2 करोड़ रुपए की रिकवरी हो चुकी है। इसके अलावा, चंपत राय के करीबी टिन्नू के घर से सोना मिला था। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, चोरी 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की हो सकती है।

विश्व सिंधी सेवा संगम संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजू मनवानी का दावा है कि 26 जनवरी 2021 को दुनियाभर के सिंधी समाज की ओर से करीब 1.5 करोड़ रुपए मूल्य की 200 किलो चांदी, 1-1 किलो की 200 ईंटों के रूप में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सौंपी गई थी। डॉ. मनवानी का आरोप है कि दान की गई चांदी की ईंटों की न तो कोई रसीद दी गई और न ही बाद में यह जानकारी दी गई कि उनका उपयोग कहां किया गया। उनका कहना है कि हाल के दान विवादों के बाद सिंधी समाज के दानदाताओं के बीच भी यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि उनकी ओर से दी गई चांदी का क्या हुआ। सिंधी समाज ने मांग की है कि दान की गई 200 किलो चांदी का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। वहीं, संगठन ने कहा है कि उसे जांच प्रक्रिया पर भरोसा है और वह जांच रिपोर्ट का इंतजार करेगा।

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