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अगस्त में लगेगा साल का आखिरी सूर्य-चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं? जानिए डेट-टाइम और डिटेल्स

अगला महीना खगोलीय घटनाओं के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि अगस्त 2026 में 15 दिनों के अंतराल में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों लगने जा रहे हैं, हालांकि ये दोनों ही ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे। इस वजह से भारत में इनका कोई सूतक काल मान्य नहीं होगा।

भारत में सूतक काल प्रभावी न होने के कारण मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और न ही शुभ कार्यों पर कोई रोक होगी। गर्भवती महिलाओं और अन्य लोगों के लिए जो नियम ग्रहण के दौरान बताए जाते हैं, वे भी इस बार अनिवार्य नहीं होंगे।  इससे पहले फरवरी में सूर्य और मार्च में चन्द्र ग्रहण लगा था।

पूर्ण सूर्य ग्रहण (12 अगस्त 2026)

तारीख: 12 अगस्त 2026 (सावन अमावस्या / हरियाली अमावस्या)​भारतीय समय (IST): यह ग्रहण भारतीय समयानुसार 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे तक चलेगा। रात का समय होने के कारण यह भारत में अदृश्य रहेगा। भारत में दिखाई ना देने के कारण इसका कोई ज्योतिषीय प्रभाव या सूतककाल मान्य नहीं होगा।​कहाँ दिखेगा: उत्तरी अमेरिका, यूरोप, आइसलैंड, ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्रों में यह पूर्ण या आंशिक रूप से दिखाई देगा।

आंशिक चंद्र ग्रहण (28 अगस्त 2026)

​तारीख: 27-28 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि (सावन पूर्णिमा)​भारतीय समय (IST): कुल अवधि लगभग 5 घंटे 39 मिनट । यह सुबह 06:55 से दोपहर 12:30 बजे के बीच रहेगा।विशेष संयोग: इस दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी है। चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए रक्षाबंधन के पर्व या राखी बांधने के समय पर इसका कोई धार्मिक प्रभाव (सूतक) नहीं पड़ेगा।कहाँ दिखेगा: यह ग्रहण मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में नजर आएगा, जहां चांद का रंग गहरा लाल (ब्लड मून) दिखाई दे सकता है।

कब लगता है सूर्य और चन्द्र ग्रहण

ज्योतिष के मुताबिक, जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है तो सूरज की रोशनी धरती तक पहुंच नहीं पाती है, तब पूर्ण सूर्य ग्रहण लगता है। चन्द्र ग्रहण में सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है, इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होते हैं। इस दौरान जब हम धरती से चांद देखते हैं तो वह हमें काला नजर आता है और इसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।

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