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चीन ने उड़ा डाले 300 डैम, बंद कर दिए 342 पावर प्लांट… रेड रिवर की इकोलॉजी बचाने के लिए कदम!

चीन ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए अपने देश में 300 डैम को तोड़ डाला है. अपनी नदियों पर मेगा डैम बनाने वाले चीन का ये पैंतरा दुनिया को हैरान कर रहा है. चीन ने सिर्फ 300 डैम तोड़ डाले हैं बल्कि लगभग साढ़े तीन सौ हाइड्रो पावर प्लांट को भी डिकमीशन कर दिया है यानी कि इन्हें बंद कर दिया है.

बता दें कि यांग्त्सी नदी (Yangtze River), जिसे चीनी में चांग जियांग कहा जाता है, एशिया की सबसे लंबी और दुनिया की तीसरी सबसे लंबी नदी है, जिसकी लंबाई लगभग 6,300 किलोमीटर है. यह तिब्बत के क्विंगहाई प्रांत में तंगलुआ पर्वतों से निकलती है और पूर्वी चीन सागर में शंघाई के पास समाप्त होती है. यांग्त्सी चीन की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो कृषि, व्यापार और जलविद्युत उत्पादन (थ्री गॉर्जेस डैम) का आधार है. यह नदी जैव-विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिसमें दुर्लभ प्रजातियां जैसे यांग्त्सी फिनलेस पोरपॉइज शामिल हैं. लेकिन इस नदी को जीवन देने वाली सहायक नदियों पर बन रहे डैम और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की वजह से यहां की इकोलॉजी पर गंभीर संकट पैदा हो गया है.

300 बांध तोड़े गए

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ की एक रिपोर्ट के अनुसार चिशुई हे – जिसे लाल नदी के रूप में भी जाना जाता है- पर 357 बांधों में से 300 को दिसंबर 2024 के अंत तक ध्वस्त कर दिया गया था. इसके अलावा, शिन्हुआ की रिपोर्ट में कहा गया है कि 373 छोटे जल विद्युत केंद्रों में से 342 को बंद कर दिया गया है. इस विध्वंस का सकारात्मक असर हुआ है. इसकी वजह से कई दुर्लभ मछली की प्रजातियां अपने प्राकृतिक प्रजनन चक्र को फिर से शुरू करने में सक्षम हो गई हैं.

रेड रिवर यानी कि लाल नदीं दक्षिण-पश्चिमी प्रांतों युन्नान, गुइझोउ और सिचुआन से होकर 400 किमी से भी ज़्यादा लंबी दूरी तय करती है. पर्यावरण विज्ञानी इसे यांग्त्ज़ी नदी के ऊपरी इलाकों में दुर्लभ और स्थानीय मछली के लिए अंतिम आश्रय स्थल मानते हैं.

पिछले कुछ दशकों में जलविद्युत संयंत्रों और बांधों के घने नेटवर्क ने जल प्रवाह को लगातार अवरुद्ध किया है जिससे नीचे की ओर पानी की मात्रा सीमित हो गई है और कुछ कुछ मामलों मे तो कुछ हिस्से पूरी तरह सूख भी गए हैं.

विलुप्त स्टर्जन मछलियों को मिली नई जिंदगी

इससे जलीय जीवन पर व्यापक असर पड़ा है. मछली समेत अन्य जलीय जीवों के आवास खत्म हो गए हैं. उनकी आबादी थम गई है. इन नदियों में कुछ मछलियां ऐसी हैं जो प्रजनन के लिए नदी में काफी दूरी तय कर दूसरे स्थानों पर जाती हैं, लेकिन डैम बनने से इनके रास्ते अवरुद्ध हो गए थे.

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