3 राशियों की किस्मत चमकाएगा ये शक्तिशाली राजयोग, सफलता के खुलेंगे नए द्वार, आर्थिक स्थिति होगी मजबूत
ज्योतिष शास्त्र में 9 ग्रहों में से गुरू ग्रह का बड़ा महत्व माना गया है। देवताओं के गुरू बृहस्पति का कुंडली में भी विशेष महत्व होता है। गुरू ज्ञान, बुद्धि, आध्यात्मिकता, भाग्य, धन, धर्म के कारक माने जाते है। गुरू धनु और मीन के स्वामी हैं। गुरु ग्रह एक से दूसरी राशि में गोचर करने में लगभग 13 महीने का समय लगाते हैं । वर्तमान में गुरु ग्रह मिथुन राशि में हैं और 18 अक्टूबर 2025 को 12 साल बाद अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करेंगे और वक्री होंगे जिससे हंस महापुरुष राजयोग का निर्माण होगा, जो 4 राशियों के लिए बेहद लकी साबित हो सकता है।आईए जानते है इन 4 राशियों के बारें में……….
हंस महापुरूष राजयोग 4 राशियों के लिए लकी
तुला राशि पर प्रभाव : गुरू का गोचर और हंस राजयोग का बनना जातकों के लिए लकी साबित हो सकता है।अक्टूबर से गोल्डन समय शुरू होगा। कारोबार में तरक्की के मार्ग खुल सकते है। नौकरीपेशा को नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पिता के साथ संबंध और मजबूत होंगे। बेरोजगारों को नौकरी के अवसर मिल सकते है।नौकरीपेशा को मनचाहे तबादले के साथ प्रमोशन की सौगात मिल सकती है। यात्रा के प्रबल योग है।
वृश्चिक राशि पर प्रभाव : गुरू गोचर और हंस महापुरुष राजयोग जातकों के लिए शुभ साबित हो सकता है। आकस्मिक धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है। जीवन में खुशियां की दस्तक हो सकती है। भाग्य का साथ मिलेगा। धर्म-कर्म के कार्यों में रूचि बढ़ेगी। विवाहितों को परिवार का सहयोग मिलेगा। नया बिजनेस शुरू करने के मौके मिलेंगे। देश- विदेश की यात्रा पर जा सकते हैं। समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति हो सकती है।आपकी बौद्धिक और आध्यात्मिक क्षमता चरम पर होगी ।
कन्या राशि पर प्रभाव: ग्रह गोचर और हंस राजयोग का बनना जातकों के लिए फलदायी सिद्ध हो सकता है। रूके अटके और अधूरे काम इस अवधि में पूरे हो सकते है। निवेश से लाभ मिल पा सकते हैं। आय में वृद्धि हो सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी ।नौकरी या बिजनेस में तरक्की के रास्ते खुलेंगे। संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार मिल सकता है।परिवार में खुशहाली आएगी। बैंकिंग, मार्केटिंग या मीडिया जैसे क्षेत्रों वालों को राजयोग से बेहद लाभ मिलेगा। स्टॉक मार्केट, सट्टा और लॉटरी से लाभ मिल सकता है।
कुंडली में कब बनता है हंस राजयोग
वैदिक ज्योतिष में हंस राजयोग को शुभ माना जाता है।जब किसी की कुंडली में बृहस्पति लग्न हो और यहां से चंद्रमा से पहले, चौथे, सातवें और दसवें भाव में कर्क, धनु या मीन राशि में होता हैं तो हंस राजयोग का शुभ योग बनता है। जिस भी जातक की कुंडली में बृहस्पति केंद्र भाव में होकर मूल त्रिकोण स्वगृही और उच्च राशि का होता है तो हंस राजयोग का निर्माण होता है। इस तरह के राजयोग से जातकों के जीवन में अच्छी सफलता, सुख, समृद्धि और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है।इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)
