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पूर्व मंत्री की ‘शायरी’ वाली माफी-भूल हमारी माफ करेंसिंधिया से बोले मंत्री-काश, आप मेरे क्षेत्र से सांसद होते; कमलनाथ को पोस्टर लगाकर ढूंढ रहे

दरअसल, नरोत्तम मिश्रा 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से हार गए थे। उन्हें हराने वाले कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती की विधायकी एक मामले में सजा होने के बाद जा चुकी है। ऐसे में दतिया संभावित उपचुनाव की दहलीज पर खड़ा है।हालांकि उपचुनाव को लेकर अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में नरोत्तम मिश्रा की शायरी, क्षेत्र में उनकी सक्रियता और उनके लगातार हो रहे दौरों को उनकी चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।इसी दौरान नरोत्तम मिश्रा ने संभावित उपचुनाव को लेकर अपनी रणनीति का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि यदि उपचुनाव होता है, तो उनकी पार्टी विकास के मुद्दे पर जनता से वोट मांगेगी, जबकि विपक्ष केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करेगा।वहीं, कांग्रेस ने नरोत्तम मिश्रा की इस सक्रियता पर तंज कसते हुए इसे सत्ता में वापसी की जल्दबाजी करार दिया है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा संभावित उपचुनाव को लेकर अभी से राजनीतिक माहौल बनाने में जुट गई है।

कमलनाथ के ‘लापता’ पोस्टर से गरमाई सियासत पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के ‘लापता विधायक’ लिखे पोस्टर छिंदवाड़ा के एक गांव में लगाए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। पोस्टर सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे भाजपा की साजिश बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।हालांकि, इस मुद्दे पर भाजपा का रुख कुछ अलग नजर आया। अक्सर कमलनाथ पर हमलावर रहने वाले भाजपा नेता रामेश्वर शर्मा ने उनके प्रति सहानुभूति जताई। उन्होंने कहा कि कमलनाथ एक वयोवृद्ध और वरिष्ठ नेता हैं, इसलिए उनके प्रति सम्मान और सहानुभूति का भाव है।हालांकि, उन्होंने तंज भी कस दिया। उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं, अगर वे गायब भी रहते हैं, तो भी मोहन यादव की सरकार ने छिंदवाड़ा समेत पूरे प्रदेश के विकास की गारंटी ली है।अब लोग कह रहे हैं कि यही राजनीति की रवायत है। सहानुभूति भी एक तरह की सियासत ही है।

सिंधिया की भक्ति में डूबे मंत्री के बड़े बोल केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खासमखास माने जाने वाले मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भरे मंच से उनसे कहा- महाराज, इस सेवक को कभी-कभी ईर्ष्या भी होती है। मंत्री की यह बात सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी हैरान रह गए।सिंधिया की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि गुना-शिवपुरी-अशोकनगर क्षेत्र सौभाग्यशाली है, क्योंकि यहां बिना मांगे ही सब कुछ मिल जाता है। यहां की जनता को महाराज सिंधिया जैसा नेता मिला है। उनके नेतृत्व में क्षेत्र में विकास की गंगा बह रही है।इसके बाद उन्होंने अपने दिल की बात भी कह दी। मंत्री ने कहा कि अगर सिंधिया उनके क्षेत्र से सांसद या मंत्री होते, तो उन्हें भी बिना मांगे सब कुछ मिल जाता।प्रद्युम्न सिंह तोमर का यह बयान अब राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे अपने ग्वालियर क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार से संतुष्ट नहीं हैं या फिर यह केवल मंच से कही गई एक भावनात्मक टिप्पणी थी।दिलचस्प बात यह है कि प्रद्युम्न सिंह तोमर खुद प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। ऐसे में विपक्ष और राजनीतिक जानकार उनके बयान को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकार उनकी अपनी है, तो फिर विकास कार्यों के लिए इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणी की जरूरत क्यों पड़ी।

कमिश्नर ने मंत्री से अपने बॉस की डांट लगवा दी एक विभाग के कमिश्नर ने अपने ही बॉस की मंत्री से डांट लगवा दी। हुआ यूं कि मंत्री ने तबादलों की सूची कमिश्नर को सौंपी थी। जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कमिश्नर ने वह सूची विभाग के प्रमुख सचिव के पास भेज दी। लेकिन प्रमुख सचिव ने उस सूची में कुछ फेरबदल कर दिए।

जब कमिश्नर की नजर इन बदलावों पर पड़ी तो उन्होंने प्रमुख सचिव से कहा कि यह सूची मंत्री की ओर से आई है। इस पर प्रमुख सचिव ने उनकी बात को ज्यादा महत्व नहीं दिया और कमिश्नर को अपने काम से काम रखने की नसीहत दे डाली।इसके बाद कमिश्नर ने प्रमुख सचिव के साथ हुई पूरी बातचीत, उसी लहजे के साथ, मंत्री को बता दी। मंत्री इस बात से नाराज हो गए और उन्होंने प्रमुख सचिव की जमकर क्लास लगा दी।प्रमुख सचिव को तुरंत समझ आ गया कि उनकी बातचीत की जानकारी मंत्री तक किसने पहुंचाई है। अब शिकायतकर्ता के तौर पर अपनी पहचान उजागर होने के बाद कमिश्नर खुद असहज हैं।वजह भी खास है। बताया जाता है कि उनसे पहले इसी पद पर तैनात एक महिला कमिश्नर का तबादला भी प्रमुख सचिव की नाराजगी के बाद हुआ था। ऐसे में मौजूदा कमिश्नर को भी अब अपने भविष्य की चिंता सता रही है।

इनपुट सहयोग – राधावल्लभ मिश्रा (दतिया), देवेंद्र ठाकुर (छिंदवाड़ा), आशीष रघुवंशी (गुना)

नीमच में सीएम डॉ. मोहन यादव के मंच पर पूर्व मंत्री और जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा नाराज नजर आए। हुआ यूं कि सकलेचा मंच से भाषण दे रहे थे। समय की कमी को देखते हुए सीएम मोहन यादव ने उन्हें भाषण छोटा रखने का इशारा कि

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