घर छोड़ने से लेकर पद्मश्री तक, जानें कैसा रहा कैलाश खेर का संगीत का सफर
कैलाश खेर बॉलीवुड इंडस्ट्री का एक ऐसा नाम है, जिनकी गिनती बेहतरीन गायको में होती है। हिंदी सिनेमा का ये चमकता सितारा आज अपना 53वां जन्मदिन मना रहा है। अपनी सुरीली आवाज से दर्शकों के दिल राज करने वाले कैलाश केवल गाने गाते नहीं है बल्कि दर्शकों के दिल तक गहरी आवाज पहुंचाते हैं।
कैलाश खेर का झुकाव बचपन से ही संगीत की ओर था और अपने शानदार गानों से उन्होंने फैंस के बीच एक अलग पहचान भी हासिल की। आज उनके जन्मदिन पर चलिए उनके करियर और लाइफ के बारे में जानते हैं।
छोटी उम्र में सिखा संगीत
7 जुलाई 1973 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के कश्मीरी हिंदू परिवार में जन्मे कैलाश का झुकाव बचपन से ही संगीत की ओर था। यह भी कहा जा सकता है कि संगीत उन्हें विरासत में मिला क्योंकि उनके पिता मंदिर मेहर सिंह के ट्रेडीशनल फोक सिंगर थे। उन्हें अपने पिता से ही संगीत की शिक्षा मिली। कम उम्र में ही हो यह सपना देख चुके थे कि उन्हें इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना है, हालांकि ये सफर आसान नहीं रहा।
14 की उम्र में छोड़ा घर
अपने सपने को पूरा करने के लिए कैलाश खेर ने केवल 14 साल की उम्र में घर छोड़ दिया। वह मेरठ से दिल्ली चले गए और म्यूजिक क्लास ज्वाइन की। यहां अपना गुजारा चलाने के लिए शाम के समय बच्चों को म्यूजिक सिखाया करते थे।
बिजनेस बना डिप्रेशन की वजह
कैलाश संगीत के पैर तो जमाना चाहते थे लेकिन साथ में कुछ बाद भी करना चाहते थे। 1999 में उन्होंने अपने दोस्त के साथ हैंडीक्राफ्ट का बिजनेस शुरू किया। इसमें उन्हें बहुत घाटा झेलना पड़ा और हालात यह हो गई थी कि उन्होंने खुद को खत्म करने का मन बना लिया था।
अध्यात्म ने दिखाई संगीत की राह
डिप्रेशन में आने की वजह से खुद को मानसिक शांति देने के लिए कैलाश ऋषिकेश चले गए। यहां उन्होंने साधु संतों के बीच समय बताया। भजन कीर्तन और आध्यात्मिक माहौल से उन्हें शांति मिली और जिंदगी में ऊर्जा की वापसी हुई। इसके बाद उन्होंने तय किया कि वो पूरी तरह से संगीत को अपना जीवन बना लेंगे।
कैसा रहा सिंगिंग करियर
साल 2001 में कैलाश में मुंबई से अपने संगीत करियर को फिर से शुरू किया। उन्होंने छोटे-छोटे विज्ञापनों में काम किया। संघर्ष का यह सफर धीरे-धीरे पहचान में बदलने लगा। फिल्म अंदाज के गाने रब्बा इश्क ना होवे से उन्हें बड़ा ब्रेक मिला। इसके बाद उन्होंने हिट गाना अल्लाह के बंदे हंस दे गाया और वह रातोंरात स्टार बन गए। इस गाने से उन्हें पूरे देश में लोकप्रियता मिली और हर घर में उनकी आवाज गूंजने लगी। इसके बाद उन्होंने तेरी दीवानी, बम लहरी, सैया, जय जयकारा कैसे कई गाने गाए। उनका कैलासा नाम का एक बैंड भी है। इसके जरिए उन्होंने संगीत को आधुनिक तरीके से दर्शकों के सामने पेश करने का काम किया।
इन पुरस्कारों से नवाजे गए
अपने शानदार म्यूजिक की बदौलत कैलाश खेर को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्हें फिल्म फेयर के साथ कई राष्ट्र पुरस्कार मिले। हिंदी के साथ उन्होंने 20 से ज्यादा भारतीय भाषाओं में गाने गाए हैं।
