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उत्तराखंड में Fire Alert बढ़ा रहे वन विभाग की धड़कनें, शीतकाल में शुष्क मौसम के कारण बढ़ रहा खतरा

देहरादून :  पिछले कुछ वर्षों में शीतकाल में जंगल में आग की बढ़ी घटनाओं ने वन विभाग की पेशानी पर बल ला दिया है। ऐसे में ग्रीष्मकाल में अग्निकाल के अलावा शीतकाल में भी वन विभाग की चुनौतियां बढ़ी हैं।

इस बार भी फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया के अलर्ट सिस्टम से वन क्षेत्रों में आग की घटनाओं की सूचना लगातार प्राप्त हो रही हैं। हालांकि, अभी तक कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, लेकिन आए दिन मिल रहे फायर अलर्ट से वन विभाग की धड़कनें जरूर बढ़ रही हैं। खासकर इस बार शीतकाल में वर्षा न के बराबर होने से चिंता और बढ़ गई है।

वैसे तो करीब एक तिहाई वन क्षेत्र वाले उत्तराखंड में मध्य फरवरी से वर्षाकाल शुरू होने तक फायर सीजन होता है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में शीतकाल में भी जंगल की आग ने वन विभाग को जख्म दिए हैं। ऐसे में सालभर वन विभाग की टीमें जंगल की आग को लेकर सतर्क रहती हैं।

फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया की ओर से वन विभाग को वन क्षेत्र में आग लगने पर सेटेलाइट के माध्यम से अलर्ट जारी किया जाता है और वन विभाग धरातल पर जाकर आग को काबू करने का प्रयास करता है

बीते एक नवंबर से अब तक वन विभाग को 50 से अधिक फायर अलर्ट प्राप्त हो चुके हैं। हालांकि, वन विभाग का दावा है कि इनमें ज्यादातर जंगल की आग की घटनाएं नहीं थीं। मुख्य वन संरक्षक निशांत वर्मा का कहना है कि इस बार अभी तक जंगल की आग की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई है।

जो अलर्ट उन्हें प्राप्त हुए हैं, उनमें से ज्यादातर खेतों में पराली जलाने, बीआरओ के सड़क निर्माण के दौरान आग जलाने और भेड़ पालकों की ओर से वन क्षेत्र में खाना बनाने आदि के लिए आग जलाने के हैं।

इसके अलावा वन विभाग की ओर से जंगल की आग से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई है। फायर क्रू स्टेशन अलर्ट मोड पर हैं। सभी संसाधन जुटा लिए गए हैं और वन मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम से नियमित निगरानी की जा रही है।

शुष्क मौसम से बड़ी घटना का खतरा

उत्तराखंड में शीतकाल में अक्टूबर में सामान्य से अधिक वर्षा हुई, लेकिन नवंबर से अब तक मौसम रूठा हुआ है। इस दौरान प्रदेश में न के बराबर वर्षा हुई। नवंबर में सामान्य से 60 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। जबकि, दिसंबर में पहले पखवाड़े में वर्षा में 100 प्रतिशत की कमी है। पिछले 15 दिन में प्रदेश में एक बूंद वर्षा नहीं हुई।

इस साल अब तक हुई जंगल की आग की घटनाएं

  • क्षेत्र, घटनाएं, प्रभावित क्षेत्र, प्रभावित पेड़, व्यक्ति घायल, मृत्यु
  • गढ़वाल, 1080, 1383, 6600, 03, 01
  • कुमाऊं, 1006, 1659, 01, 03, 01
  • वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र, 100, 383, 00, 01, 00
  • कुल, 2186, 3425, 6601, 07, 02
  • (प्रभावित क्षेत्र हेक्टेयर में)

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