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बच्चों के लिए मोबाइल के उपयोग सीमित करने की जरूरत : प्रो. मित्तल

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स में दो दिवसीय स्ट्रै्रेबिस्मिक एंड पीडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (स्पोसी) का 10वां वार्षिक सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन में देशभर से 100 से अधिक अकादमिक सदस्यों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जिसमें उन्होंने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए और बच्चों को प्रभावित करने वाले कई विवादास्पद नेत्र विकारों पर गहन चर्चा की।
सोमवार को आयोजित सम्मेलन का संस्थान की कार्यकारी निदेशक और सीईओ डॉ. मीनू सिंह ने उद्घाटन किया। कहा कि दृष्टि की स्थायी हानि और कॉस्मेटिक दोषों से बचने के लिए युवाओं में भैंगापन की पहचान की जानी चाहिए और उसका उपचार किया जाना चाहिए। सम्मेलन में नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार मित्तल ने अपने व्याख्यान में बच्चों के मोबाइल फोन के उपयोग को सीमित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। साथ ही बढ़ते स्क्रीन समय के परिणामस्वरूप बाल आयु वर्ग में मायोपिया ग्रसित रोगियों की संख्या में हालिया वृद्धि पर भी ध्यान आकर्षित किया।सोसाइटी के सचिव प्रो. पीके पांडे ने लकवाग्रस्त स्ट्रैबिस्मस के प्रबंधन पर अपनी राय व्यक्त की। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बाल मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, एम्ब्लियोपिया, भैंगापन, ट्यूमर और प्रीमेच्योरिटी की रेटिनोपैथी (आरओपी) आदि पर चर्चा की। इस दौरान एक ऑनलाइन सत्र का आयोजन भी किया गया, जिसमें दुनियाभर के नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों व चिकित्सा विज्ञानियों ने जटिल भैंगापन मामले पर अपने अनुभव और दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। इस मौके पर प्रो. जया चतुर्वेदी, प्रो. आरबी. कालिया, प्रो. पीजी देशपांडे, प्रो. पीके पांडे, प्रो. अजय अग्रवाल, प्रो. अनुपम सिंह, डॉ. नीति गुप्ता, डॉ. रामानुज सामंत आदि शामिल रहे

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