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गिनीज बुक में दर्ज नहीं हो सका हथिनी वत्सला का नाम, 100 के पार बताते हैं उम्र

पन्ना, । पन्ना टाइगर रिजर्व की शान तथा देशी व विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हथिनी वत्सला को दुनिया में सबसे अधिक उम्र हथिनी बताया जाता है, लेकिन अभी तक उसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुआ। इसकी मुख्य वजह पीटीआर कार्यालय में वत्सला का जन्म रिकॉर्ड उपलब्ध न होना है। इस दिशा में वर्ष 2007 में पन्ना टाइगर रिजर्व के तत्कालीन क्षेत्र संचालक शहवाज अहमद की पहल से वत्सला के जन्म का रिकॉर्ड नीलांबुर फारेस्ट डिवीजन से प्राप्त करने हेतु पत्राचार किया गया था। बाद में अगस्त 2018 में जब शहवाज अहमद प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी के पद पर रहते हुए पन्ना दौरे पर आए, उस समय भी वत्सला का जन्म रिकॉर्ड नीलांबुर से मंगाने के निर्देश दिए थे। लेकिन श्री अहमद के सेवानिवृत्त होने के बाद यह मामला ठंडा पड़ गया। शासन प्रशासन स्तर पर इस दिशाा में जरूरी कदम उठाना चाहिए। ताकि वत्सला को जीवित रहते दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी होने का सम्मान अधिकृत रूप से मिल सके। वर्तमान समय में उसकी आंखों में मोतियाबिंद आ जाने से उसेेेे कम दिखाई देता है साथ ही पाचन तंत्र भी कमजोर हो गया है। दुनिया के सबसे अधिक उम्र के हाथी की मौत 86 वर्ष में हो चुकी है : इससे पहले दुनिया का सबसे अधिक उम्र का लिन वांग नाम का हाथी ताइवान के चिडि़याघर में था, जिसकी 86 वर्ष की उम्र में मौत हो चुकी है। इस रिकॉर्ड को भारत की हथिनी ने तोड़ दिया है। जी हां, दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी पन्ना टाइगर रिजर्व की वत्सला है, जिसकी उम्र 100 वर्ष से अधिक लगभग 105 वर्ष बताई जा रही है। पन्ना टाइगर रिजर्व की यह उम्रदराज हथनी दो बार मौत को चकमा दे चुकी है।

घर के लोग सोते रहे और चोर ले उड़े लाखों के जेवरात यह भी पढ़ें वत्सला के साथ महावत रमजान खान व चारा कटर मनीराम भी होशंगाबाद से आए थे: पिछले दो दशक से भी अधिक समय से वत्सला की सेहत पर नजर रखने के साथ-साथ उसे हर मुसीबत से बाहर निकालने वाले पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि वत्सला केरल के नीलांबुर फॉरेस्ट डिवीजन में पली-बढ़ी है। वत्सला ने अपना प्रारंभिक जीवन नीलांबुर वन मण्डल (केरल) में वनोंपज परिवहन में व्यतीत किया।

इस हथिनी को 1971 में केरल से होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) लाया गया। उस समय वत्सला की आयु 50 वर्ष से अधिक थी। हथिनी वत्सला को 1993 में होशंगाबाद के बोरी अभ्यारण्य से पन्ना राष्ट्रीय उद्यान लाया गया, तभी से यह यहां की शोभा बढ़ा रही है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि वत्सला के साथ महावत रमजान खान व चारा कटर मनीराम भी होशंगाबाद से आए थे, जो आज भी पन्ना टाइगर रिजर्व में वत्सला की देखरेख करते हैं। वत्सला को वर्ष 2003 मेंरिटायर कर कार्य से मुक्त कर दिया गया था। Panna Tiger Reserve: बाघ को पानी में मस्ती से नदी पार करता देख खुश हुए पर्यटक

महावत रमजान खान (60) ने बताया कि मैं वत्सला के साथ पन्ना टाइगर रिजर्व में आया था, तब से यहीं हूँ। वत्सला की अधिक उम्र और सेहत को देखते हुए वर्ष 2003 में उसे रिटायर कर कार्य से मुक्त कर दिया गया था। रिटायरमेंट के बाद से वत्सला के ऊपर कभी भी होदा नहीं कसा गया, न ही किसी कार्य में उपयोग किया गया। मौजूदा समय वत्सला की दोनों आंखों में सफेदी आ जाने के कारण कम दिखता है। चारा कटर हथिनी का डंडा बनकर उसे जंगल घुमाने के लिए ले जाता है। चारा कटर मनीराम ने बताया कि वह होशंगाबाद का रहने वाला है, वत्सला के साथ ही यहां आया था। हथिनी का पाचन तंत्र कमजोर हो चुका है, इसलिए उसे घास व गन्ना काट-काट कर खिलाता हूँ। पन्ना की ऐतिहासिक रथयात्रा महोत्सव प्रारंभ पन्ना की ऐतिहासिक रथयात्रा महोत्सव प्रारंभ यह भी पढ़ें मनीराम ने बताया कि हथिनी का सूंड या कान पकड़कर रोज उसे जंगल में भ्रमण कराता हूं। क्योंकि हथिनी बिना सहारे के ज्यादा दूर तक नहीं चल सकती। हाथियों के कुनबे में शामिल छोटे बच्चे भी घूमने टहलने में वत्सला की पूरी मदद करते हैं। बेहद शांत और संवेदनशील है हथिनी वत्सला: हथिनी वत्सला अत्यधिक शांत और संवेदनशील है। पन्ना टाइगर रिजर्व में हाथियों के कुनबे में बच्चों की देखभाल दादी मां की भांति करती है। कुनबे में जब कोई हथिनी बच्चे को जन्म देती है, तो वत्सला जन्म के समय एक कुशल दाई की भूमिका भी निभाती है। डॉ. गुप्ता बताते हैं कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार हथिनी वत्सला ने पन्ना एवं होशंगाबाद में किसी भी बच्चे को जन्म नहीं दिया। उन्‍होंने बताया कि जंगली हाथी की औसत उम्र 60 से 70 साल होती है, 70 वर्ष की उम्र तक हाथी के दांत गिर जाते हैं। डॉ. संजीव कुमार गुप्ता के मुताबिक वत्सला की उम्र 100 वर्ष से अधिक हो चुकी है, जिसका असर शरीर के अंगों पर पडऩे लगा है। उसकी आंखों में मोतियाबिंद हो चुका है, जिससे उसे कम दिखता है। पाचन तंत्र भी कमजोर हो गया है फलस्वरूप उसको सुगमता से पचने वाला विशेष आहार दिया जाता है।

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