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दुनिया कभी नहीं भूल सकेगी विश्व के विज्ञान में भारत का योगदानः तपन कुमार

मेरठ। सदियों तक सोने की चिड़िया और विश्वगुरु के नाम से विख्यात बीते कुछ सालों से दीन हीन हालत में दिखाने का कुचक्र रचा जा रहा है। बीते काफी अरसे से इसी झूठ को जीने के लिए अभिशप्त वर्तमान पीढ़ी अब इस पर भरोसा भी करने लगी है। अगर आगे बढ़ना है तो विदेशी रहन-सहन और आचार व्यवहार को अपनाने की जिद को युवाओं में आम तौर पर देखा जा सकता है। समृद्ध इतिहास और सक्षम विज्ञान के अपने गौरवशाली इतिहास का परिचय नई पीढ़ी से कराने के लिए आईआईएमटी विश्वविद्यालय में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
बृहस्तपतिवार को आईआईएमटी विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल में दुनिया के इतिहास और विज्ञान में भारत के योगदान पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। आईआईएमटी के प्रति कुलाधिपति डॉ मयंक अग्रवाल ने अतिथि का परिचय कराते हुए बताया कि अगर राष्ट्र को आगे बढ़ाना है तो छात्रों को इन जानकारियों को आगे भी लोगों से साझा करना होगा।
विज्ञान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को छात्रों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक तपन कुमार ने छात्रों के साथ तथ्यों के साथ जानकारियां साझा की। उन्होंने छात्रों को भारत के प्राचीन ऋषि मुनियों और वैज्ञानिकों की उपलब्धियों के बारे में तफ्सील से जानकारी देते हुए झूठी अवधारणाओं का सच बताया।
खगोल शास्त्र, रसायन शास्त्र, भौतिक विज्ञान से लेकर गणित के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए तपन कुमार ने साबित किया कि भारतीय विज्ञान की इन्हीं उपलब्धियों के कारण भारत को विश्व गुरु कहा जाता था। भास्कराचार्य के ग्रंथ लीलावत, नागार्जुन के पारे से सोना बनाने की विधि, वैदिक गणित के समृद्ध इतिहास से लेकर परमाणू की गणना और क्लोनिंग की जैविक विधि के गूड़ ज्ञान छात्रों के लिए नई और बेहद रोचक जानकारियां साबित हुई।
विज्ञान विभाग के डीन डॉ यतींद्र चतुर्वेदी ने विशेष व्याख्यान के लिए पहुंचे तपन कुमार का धन्यवाद देते हुए प्रो चांसलर डॉ मयंक अग्रवाल और बाकी शिक्षकों और छात्रों का आभार जताया।

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