मंत्री पद नहीं, फिर भी असर कम नहीं — दतिया में आज भी जनता के चहेते हैं डॉ. नरोत्तम मिश्रा
ग्वालियर विनय शर्मा मंत्री पद और विधायक का ओहदा भले ही अब न हो, लेकिन डॉ. नरोत्तम मिश्रा का कद न तो संगठन में घटा है, और न ही जनता के दिलों में। आज भी दतिया में विकास की बात हो या किसी नागरिक की जरूरत — सबसे पहले एक ही नाम सामने आता है डॉ. नरोत्तम मिश्रा। पूर्व गृह मंत्री रहते हुए जिस प्रकार उन्होंने क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और सिंचाई से जुड़ी योजनाओं को जमीन पर उतारा, वही रफ्तार उन्होंने अब भी बनाए रखी है — बिना किसी सरकारी पद के।अभी हाल ही में अटल योजना के अंतर्गत दतिया विधानसभा क्षेत्र की 10 पंचायतों को 3.75 करोड़ रुपये की योजना की सौगात मिली, जिसमें उनकी भूमिका केंद्रीय रही। 1.88 करोड़ रुपये की प्रथम किश्त भी स्वीकृत हो चुकी है।
जनता में अब भी वही विश्वास
सड़क किनारे दुकान हो या किसी गांव की चौपाल, लोग आज भी कहते हैं — “मिश्रा जी हैं, तो समाधान ज़रूर होगा।” यही भरोसा उनकी राजनीति को पद से ऊपर ले जाता है।
भले ही फिलहाल सरकार में किसी पद पर नहीं हैं, लेकिन पार्टी के अंदर उनका अनुभव, निर्णय क्षमता और ज़मीनी पकड़ आज भी उन्हें वरिष्ठतम व कद्दावर नेताओं की पंक्ति में बनाए हुए है। चाहे दिल्ली की बैठक हो या भोपाल की रणनीति — डॉ. मिश्रा की मौजूदगी अब भी निर्णायक मानी जाती है। राजनीति में ऐसे उदाहरण कम ही मिलते हैं जब कोई नेता बिना पद के भी पद से ज़्यादा सक्रिय नजर आता है। डॉ. मिश्रा आज उसी परंपरा का जीवंत प्रमाण हैं।
