ये सड़क नहीं आपदा में अवसर है_अफसर नेताओं का पेट भरने गड्ढे जरूरी हैं
ग्वालियर में हर बारिश आपदा में अवसर लेकर आती है। कभी पाताल में समाती सड़कें तो कभी घटिया सरकारी निर्माण कार्यों के चलते ठेकेदार अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के भूखे पेट में निवाला जाता है। बारिश के मौसम में पानी से लबालब होती और धंसती हुई सड़कों को आप आपदा समझने की भूल कतई न करें क्योंकि इन घटिया सड़कों के माध्यम से हर साल देश प्रदेश की आर्थिक तरक्की होती है। हजारों मजदूरों को रोजगार मिलता है। और फिर सरकारी अफसरों को कमीशन भी तो मिलता है जो वे शराब शबाब में उड़ाते हैं बेनामी संपत्ति खरीदते हैं और नेता चुनाव के लिए फंड इकट्ठा करते हैं जो हर चुनाव में आपके पास ही तो पहुंचता है। लेकिन आपकी समझ में जरा सी बात नहीं आती कि भाई ये कौन घोटाला घपला या भ्रष्टाचार नहीं है ये केवल और केवल देश की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर चेतकपुरी की सड़क को ही ले लीजिए एक माह में चार बार धँसकने वाली इस सड़क ने देश भर में सुर्खियां बटोरी हैं सिंधिया राजघराने के पड़ोस में बनी इस सड़क का जब ये हाल है तो बाकी शहर की सड़कों की। हालत समझी जा सकती है। खैर जो भी कलेक्टर महोदया ने ऑफिस में कुर्सी तोड़ रहे कुछ अधिकारियों की ड्यूटी इस सड़क की जांच में लगा दी है। हालांकि ये जांच भी आपदा में अवसर ही साबित होने वाली है क्योंकि आज तक किसी भी जांच में किसी भी इंजीनियर ठेकेदार या अधिकारी ने तो सजा मिली है और न ही मिलेगी बशर्ते जांच करने वाले अधिकारियों की चांदी जरूर हो जाएगी।
