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इस देस न आना लाडो_यहाँ जहर देकर भूखा रखकर मार देते हैं

आज बेटियां भले ही जमीन से लेकर आसमान तक बुलंदी के झंडे गाढ़ कर अपने देश का नाम रोशन कर रही हैं, लेकिन अभी समाज में कई वर्ग अथवा परिवार ऐसे हैं जो बेटी को आज भी अभिशाप मानती है। ऐसा ही एक उदाहरण शिवपुरी जिले के ग्राम खांदी में सामने आया है। यहां एक मासूम बच्ची दिव्यांशी पुत्री लाखन धाकड़ उम्र 1 साल तीन माह का उसके स्वजनों ने महज इसलिए इलाज नहीं कराया, क्योंकि वह लड़की थी। परिणाम स्वरूप वह बीमार होकर कुपोषण का शिकार हो गई। दिव्यांशी ने शनिवार की दोपहर जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस पूरे मामले में सीएमएचओ का कहना है कि बच्ची को 1 अगस्त को दस्तक अभियान के तहत चिंहित किया गया। स्वजनों को इस बात के लिए समझाया गया कि वह बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवा दें, लेकिन उसके परिवार वाले उसे अस्पताल में भर्ती करवाने तैयार नहीं हुए। इसके बाद सरपंच से संपर्क कर मोहल्ले, पड़ौस के लोगों की पंचायत बुलवा कर दिव्यांशी के स्वजनों को समझाइश दी गई। इसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल भर्ती करवाया गया, लेकिन इसके बावजूद उसके परिवार वाले उसे अस्पताल से लेकर घर भाग गए। आज बच्ची को जिला अस्पताल लेकर आए, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

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