RSS ने बंगाल में कैसे तैयार की भाजपा के लिए जमीन यहां समझें संगठन की माइक्रो प्लानिंग
पश्चिम बंगाल में आरएसएस के माइक्रो प्लानिंग ने भारतीय जनता पार्टी कि जीत की जमीन काफी ज्यादा मजबूत की। 15 साल पहले पश्चिम बंगाल में संघ की शाखा की संख्या मात्र 450 के आसपास थी, जो बढ़कर 5000 से अधिक हो गई है। संघ के शताब्दी वर्ष में उसकी राजनीतिक शाखा भारतीय जनता पार्टी पहली बार पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज होने जा रही है। आइए जानते हैं कि संघ ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के लिए जमीन कैसे तैयार की।
छोटी-बड़ी करीब पौने दो लाख बैठक
पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने की तैयारी में लगी है। पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी के जीत का सूत्रधार यदि माने तो संघ की सक्रियता के कारण भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ काफी ज्यादा बढ़ा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के योगदान को महत्वपूर्ण कहा जा रहा है। आरएसएस ने भारतीय जनता पार्टी की जीत की जमीन काफी ज्यादा मजबूत की। संघ से मिली जानकारी के अनुसार आरएसएस ने छोटी-बड़ी लगभग पौने दो लाख के आसपास बैठकें की। लोगों के बीच जनजागरण किया। आरएसएस ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापक सघन रणनीति से यह राज्य भाजपा की झोली में डाल दिया है।
22 लाख युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया
संघ एवं उसके सहयोगी संगठन ने लगभग 22 लाख युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया था। जमीनी स्तर के मतदाताओं के साथ नए मतदाताओं को मतदान केंद्र तक खींच लाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बड़ी भूमिका रही है। RSS बार-बार यह दोहरा रहा था कि शत प्रतिशत मतदान हो। शत प्रतिशत मतदान की मुहीम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओयों की बड़ी हिस्सेदारी देखी गई। इसका परिणाम यह रहा कि पश्चिम बंगाल के दोनों चरणों में हुए चुनाव में वोटिंग परसेंटेज में काफी ज्यादा इजाफा हुआ। आरएसएस के स्वयंसेवक शांति से निरंतर जमीनी स्तर पर आमजन से संपर्क पर ध्यान केंद्रित किए हुए थे, जो कि गेम चेंजर साबित हुई। 15 साल पहले पश्चिम बंगाल में संघ की शाखाओं की संख्या मात्र 450 के आसपास थी, जो बढ़कर 5000 से अधिक हो गई है।
कार्यकर्ताओं को क्या दिशा निर्देश दिए गए?
संघ ने पिछले 3 वर्षों में अपना काफी संगठनात्मक विस्तार किया। संघ के तीनों क्षेत्र, दक्षिणी बंग प्रांत, उत्तर बंग प्रांत, मध्य बंग प्रांत ने इस दौरान काफी जिम्मेदारियां निभाईं। 35000 के आसपास रामनवमी के कार्यक्रम किए गए, हिंदू सम्मेलन किए गए, मठ-मंदिर, साधु-संतों को बाहर निकालकर लोगों को जन जागृत करने के लिए अभियान चलाया। कार्यकर्ताओं को दिशा निर्देश दिया गया था कि हिंदुत्व के मुद्दे से दूर न जाएं, जाति समीकरण को जोड़ते हुए हिंदुत्व के मूल मुद्दे को बनाए रखें, हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए साधु-संतों का पूरा सहारा लिया गया।
घर-घर जाकर बूथ लेवल पर मीटिंग
संघ के विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संघ एवं उसके सहयोगी संगठनों के स्वयंसेवक घर-घर जाकर बूथ लेवल पर मीटिंग करते थे, उन लोगों को समझते थे, लोगों के बीच में जो-जो कंफ्यूजन था, उसको दूर करने का काम संघ और उसके सहयोगी संगठन ने किया। इसके साथ ही लोगों को भाजपा के पक्ष में कन्वर्ट करने का काम किया। विपक्ष जो नैरेटिव सेट करता था, वह नैरेटिव हावी ना हो, उस पर संघ और उसके सहयोगी संगठन गहनता से कम कर रहे थे। जनता में गलत नैरेटिव से कोई भ्रम पैदा न हो उसको लेकर संघ काफी सक्रिय था। आम लोगों से देश प्रेम की बातें करना। हर नुक्कड़ बैठकों का मुद्दें में देश प्रेम, बंगाल का औद्योगिक विकास, युवाओं का रोजगार पर काफी जोर दिया जा रहा था। हर गांव में संघ और उसके सहयोगी संगठनों के 75 से 100 कार्यकर्ता काम में जुटे हुए थे। लोगों का फीडबैक एकत्र कर रहे थे। फीडबैक के आधार पर उन क्षेत्रों में चुनावी रणनीति उसी हिसाब से तय की जा रही थी।
