Fri. May 15th, 2026

होर्मुज के बाद मिली एक और ‘कमजोर नस’? जानें, इंटरनेट की लाइफलाइन पर क्यों है ईरान की नजर

 दुनिया आज इंटरनेट पर जितनी निर्भर है उतनी शायद पहले कभी नहीं थी। बैंकिंग से लेकर शेयर बाजार, सेना से लेकर मोबाइल कॉल और वीडियो स्ट्रीमिंग तक, सब कुछ इंटरनेट के सहारे चलता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि दुनिया का यह पूरा डिजिटल सिस्टम समुद्र के नीचे बिछी हजारों किलो टर लंबी केबलों पर टिका हुआ है। अब इन्हीं केबलों को लेकर ईरान के हालिया बयान ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

ईरान से जुड़े सरकारी मीडिया संस्थानों ने हाल ही में सुझाव दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली समुद्र के नीचे की इंटरनेट केबलों को चलाने वाली कंपनियों से फीस ली जाए, क्योंकि ये केबल ईरान के समुद्री क्षेत्र के पास से गुजरती हैं। इसके साथ ही ईरान की ओर से यह चेतावनी भी दी गई कि ये केबल मध्य-पूर्व की अर्थव्यवस्थाओं की ‘कमजोर नस’ बन सकती हैं। यहीं से सवाल उठता है कि आखिर ये अंडरसी इंटरनेट केबल क्या हैं, ये कितनी अहम हैं और इनके खतरे में आने से दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है?

क्या होती हैं अंडरसी इंटरनेट केबल?

बहुत से लोग मानते हैं कि इंटरनेट किसी ‘क्लाउड’ या हवा में चलने वाली तकनीक है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। दुनिया का 95 प्रतिशत से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय डेटा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों के जरिए चलता है। दुनिया भर में 500 से ज्यादा अंडरसी केबल मौजूद हैं, जो महाद्वीपों को आपस में जोड़ती हैं। इन्हीं के जरिए ईमेल, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन बैंकिंग, शेयर बाजार और अन्य तरह का कम्यूनिकेशन संभव हो पाता है।

क्यों अहम हैं होर्मुज और स्वेज जैसे रास्ते?

मध्य-पूर्व में दुनिया की कई अहम इंटरनेट केबलें गुजरती हैं। खासकर लाल सागर, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य, स्वेज नहर और होर्मुज जलडमरूमध्य ऐसे समुद्री रास्ते हैं, जिन्हें अब ‘डिजिटल चोकपॉइंट’ कहा जाने लगा है। ये रास्ते यूरोप, एशिया और अफ्रीका की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ते हैं। अगर यहां कोई बाधा आती है तो उसका असर एक साथ कई देशों पर पड़ सकता है। साल 2024 में लाल सागर में अंडरसी केबल से जुड़ी घटनाओं के कारण यूरोप और एशिया के बीच करीब 25 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक प्रभावित हुआ था। इससे साफ है कि समुद्र के नीचे की ये केबलें कितनी संवेदनशील और महत्वपूर्ण हैं।

ईरान की नजर इन केबलों पर क्यों?

ईरान लंबे समय से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को अपनी रणनीतिक ताकत के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अब इंटरनेट केबलों को लेकर आए बयान यह दिखाते हैं कि ईरान डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी एक रणनीतिक हथियार की तरह देख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन केबलों को गलती से या जानबूझकर नुकसान पहुंचता है तो इसका असर सिर्फ इंटरनेट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अब नई ‘लाइफलाइन’

पहले महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर का मतलब तेल पाइपलाइन, बंदरगाह या इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड हुआ करता था। लेकिन अब डेटा और इंटरनेट नेटवर्क भी उतने ही जरूरी हो गए हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई इंटरनेट केबलें समुद्र के नीचे एक ही रास्ते से गुजरती हैं। यानी अगर किसी एक जगह पर नुकसान होता है, तो एक साथ कई देशों और क्षेत्रों की इंटरनेट सेवा प्रभावित हो सकती है। इसे ‘सिंगल पॉइंट ऑफ फेल्योर’ कहा जाता है।

केबल के टूटने पर क्या हो सकता है?

अगर किसी बड़े इलाके में अंडरसी केबल कट जाती है या नुकसान पहुंचता है, तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसकी वजह से इंटरनेट की स्पीड बेहद धीमी हो सकती है और साथ ही कई क्षेत्रों में संचार पूरी तरह ठप हो सकता है। वहीं, बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान प्रभावित हो सकते हैं तथा शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है जिससे निवेशकों में डर और अनिश्चितता बढ़ सकती है। खासकर अफ्रीका, मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया के कई विकासशील देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि वहां बैकअप नेटवर्क कम हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *