थाने में नहीं हुई सुनवाई। महिला ने खाया जहर, पुलिस के फूले हाथ पांव
ग्वालियर मध्य प्रदेश ग्वालियर के मुरार थाने में एक महिला पिछले 10-12 दिनों से थाने के चक्कर लगा लगा कर थक गई । तमाम मिन्नतों के बाद भी उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी और जब वह थाने के चक्कर लगा लगाकर पूरी तरह से हताश हो गई तो उसने आत्महत्या करने का रास्ता चुना। उसने थाना परिसर में जहर खाकर अपनी जान देने की कोशिश की। जैसे ही महिला ने थाने में जहर खाया वैसे ही पूरे थाने में हड़कंप मच गया। इस पूरे मामले में सबसे हैरानी की बात यह है कि मुरार थाने में थाना प्रभारी भी एक महिला नैना पटेल है और एक महिला दूसरे महिला की पीड़ा पर कितनी संवेदनशील हो सकती है वह हकीकत भी यह घटना बयान कर रही है।
मुरार थाने के पुलिसकर्मी पीड़ित महिला को मुरार के जिला अस्पताल ले गए जहाँ उसे प्राथमिक इलाज के बाद जयारोग्य चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। महिला को पहले नौकरी लगवाने का लालच दिया और फिर शादी का झांसा देकर उसका लगातार शारीरिक शोषण किया गया था। महिला द्वारा थाने में जहर खाने के बाद मुरार थाना पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न गंभीर धाराओं मामला दर्ज कर लिया है। लेकिन सवाल यह खड़ा होता है कि क्या मध्य प्रदेश के थानों में अपनी सुनवाई कराने के लिए अब पीड़ितों को जहर खाना पड़ेगा? आत्महत्या का रास्ता अपनाना पड़ेगा। तब ही उनकी सुनवाई होगी अन्यथा उन्हें दुत्कार कर भगा दिया जाएगा?
भिंड की रहने वाली महिला की शादी वर्ष 2016 में हुई थी। शादी के बाद उसकी दो छोटी बच्चियां हैं। करीब 4 साल पहले पीड़िता अपनी बड़ी बेटी को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए ग्वालियर में किराये का मकान लेकर रहने आई थी। मोहल्ले में ही आरोपी गजेंद्र केवट की एक ऑनलाइन सेंटर की दुकान थी। पीड़िता अक्सर अपने बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए गजेंद्र की दुकान पर जाती थी, जिसके चलते दोनों के बीच जान-पहचान हो गई । गजेंद्र ने पीड़िता से कहा कि “तुम बच्चों के साथ अकेली रहती हो, तुम्हें पैसों की सख्त जरूरत होगी। मैं तुम्हारी एक अच्छी जगह नौकरी लगवा दूंगा।
इसी बहाने से माह मई 2024 में आरोपी नौकरी का झांसा देकर महिला के किराये के कमरे पर पहुंचा और वहां उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।इसके बाद आरोपी लगातार नौकरी लगवाने और शादी करने का झांसा देकर महिला का शारीरिक शोषण करता रहा। 23 मई 2026 तक आरोपी ने संबंध बनाए अब शादी से मुकर गया है।सोमवार को महिला मुरार थाना पहुंची और सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए जहर खाने का प्रयास किया। जिस पर वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने तत्काल उसे रोक लिया और तत्काल मेडिकल के लिए हॉस्पिटल पहुंचाया है। पुलिस ने तत्काल आरोपी के खिलाफ नौकरी व शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज किया है। मुरार जिला चिकित्सालय के ड्यूटी डॉक्टर का कहना है कि अभी फिलहाल महिला की हालत ठीक है।
हालांकि इस समय महिला खतरे से बाहर है, जहर का असर उस पर जाता नहीं हुआ और उसकी शिकायत पर एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है, लेकिन यह घटना मध्यप्रदेश की पुलिस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रही है। ऐसे कितने ही पीड़ित फरियादी थाने के चक्कर लगाते होंगे और थक हारकर अन्याय सहकर ही चुपचाप अपने काम में जुट जाते होंगे। मध्यप्रदेश पुलिस का रवैया आमजन के प्रति बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं है। जहां एक ओर रसूखदारों और वीआईपी लोगों की सुनवाई बैठे बैठे हो जाती है, वहीं गरीब और सामान्य लोग अन्याय सहन करने के बाद भी थाने जाने से कतराते हैं क्योंकि थाने पर अमानवीय व्यवहार होता है, चक्कर कटाए जाते हैं और आखिर में फरियादियों को ही पीड़ित करके भगा दिया जाता है। अब हर कोई तो इस पीड़िता की तरह नहीं होता कि हताश होकर जहर खा ले, क्योंकि कई फरियादियों पर अपने परिवार की जिम्मेदारी होती है और यह जिम्मेदारी न होने देती और न मरने देती। क्या थानों में व्यवस्था आम जन हितेशी हो पाएगी?यह एक बड़ा सवाल है
