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उज्जैन-इंदौर रोड पर बवाल, दो गायों की मौत के बाद ग्रामीणों ने शुक्ला ट्रैवल्स की बस फूंकी

उज्जैन-इंदौर मुख्य मार्ग पर सोमवार को बड़ा बवाल देखने को मिला। तेज रफ्तार यात्री बस की चपेट में आने से दो गायों की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने शुक्ला ट्रैवल्स की बस में आग लगा दी, जिससे बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई। राहत की बात यह रही कि घटना के समय बस में कोई यात्री मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया। पुलिस ने आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में जांच शुरू कर दी है।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की वजह से आए दिन सड़क हादसे होते हैं, लेकिन सुरक्षा के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मवेशियों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था करने की मांग की है।

हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों को लेकर फिर उठे सवाल

स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां से लगातार भारी वाहन और यात्री बसें गुजरती हैं। कई बार ग्रामीणों ने प्रशासन से स्पीड कंट्रोल, चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन स्थिति में खास बदलाव नहीं आया। सोमवार को दो गायों की मौत के बाद लोगों का गुस्सा अचानक फूट पड़ा और उन्होंने बस को आग के हवाले कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद कुछ देर के लिए सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। आग लगने के कारण बस पूरी तरह जल गई और मौके पर धुएं का गुबार फैल गया। पुलिस और दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि बस में आग किन परिस्थितियों में लगाई गई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की है, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी की जा सके।

मवेशियों की सुरक्षा और सड़क प्रबंधन पर बढ़ी चिंता

यह घटना केवल आगजनी तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा और आवारा मवेशियों की समस्या पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य मार्ग पर अक्सर गाय और अन्य मवेशी घूमते रहते हैं। ऐसे में तेज रफ्तार वाहन उनके लिए जानलेवा साबित होते हैं। उनका मानना है कि यदि सड़क किनारे पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, बैरिकेडिंग, संकेतक और नियमित निगरानी की व्यवस्था हो, तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस मार्ग पर स्पीड लिमिट का सख्ती से पालन कराया जाए, संवेदनशील इलाकों में चेतावनी संकेत लगाए जाएं और मवेशियों को सड़क पर आने से रोकने के लिए स्थानीय निकाय और संबंधित विभाग मिलकर काम करें। पुलिस ने आगजनी की घटना का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं बस में कोई यात्री मौजूद नहीं होने से जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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