पश्चिम बंगाल SIR 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित, सुप्रीम कोर्ट में EC ने ट्रिब्यूनल बढ़ाने का प्रस्ताव रखा
पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। एसआईआर के बाद मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े लाखों मामलों की अपील लंबित है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि 16 सितंबर तक 37 लाख से अधिक अपीलों का निपटारा होना बाकी था।
आयोग ने कहा कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इन मामलों को पूरा करने में 12 साल से ज्यादा का समय लग सकता है। ऐसे में आयोग ने अपीलों के जल्द निपटारे के लिए ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
लाखों मामलों की अपील लंबित
चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर से जुड़े आदेशों के खिलाफ कुल 38.31 लाख से अधिक अपीलें दाखिल की गई हैं। इनमें लगभग 22.21 लाख मामले ऐसे हैं, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद उसे दोबारा शामिल करने की अपील की गई है। वहीं लगभग 16.10 लाख अपीलें ऐसे नामों को चुनौती देने से जुड़ी हैं जिन्हें मतदाता सूची में शामिल किया गया है। अभी 19 ट्रिब्यूनल इन मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इन ट्रिब्यूनलों का गठन किया था। इनमें हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को जिम्मेदारी दी गई है।
चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में बताया कि अप्रैल के मध्य में ट्रिब्यूनलों के काम शुरू करने के बाद अब तक 1,26,194 अपीलों का निपटारा किया जा चुका है। इस हिसाब से हर महीने औसतन लगभग 25 हजार मामलों पर फैसला हुआ है। 16 सितंबर तक 37,05,235 अपीलें लंबित थीं। आयोग का कहना है कि अगर इसी गति से सप्ताह के सातों दिन काम जारी रहा तो मौजूदा लंबित मामलों को खत्म करने में करीब 146 महीने यानी 12 साल से ज्यादा लग सकते हैं।
42 लोकसभा सीटों के हिसाब से ट्रिब्यूनल बढ़ाने का प्रस्ताव
लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया है। आयोग का प्रस्ताव है कि पश्चिम बंगाल की प्रत्येक लोकसभा सीट के लिए एक ट्रिब्यूनल बनाया जाए। इस तरह राज्य में कुल 42 ट्रिब्यूनल हो जाएंगे। आयोग का कहना है कि इससे एसआईआर से जुड़ी अपीलों की सुनवाई में तेजी लाई जा सकेगी और लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा।
अब तक निपटाए गए मामलों में 1,13,943 अपीलों में मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल करने का फैसला हुआ है। वहीं, एसआईआर के कारण विधानसभा चुनाव के नतीजों पर असर पड़ने के दावे को भी चुनाव आयोग ने खारिज किया है। आयोग के मुताबिक, सिर्फ हटाए गए नामों और चुनाव में जीत के अंतर की तुलना के आधार पर एसआईआर के प्रभाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है।
