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डोल ग्यारस पर MP में निकलेंगे डोल और झांकियां, निभाई जाएंगी पुरानी परंपराएं

आज डोल ग्यारस है, ऐसे में मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भव्य चल समारोह निकाले जाने वाले हैं। उज्जैन इंदौर सहित मध्य प्रदेश के कुछ शहरों में मौजूद प्रसिद्ध मंदिरों में धार्मिक आयोजन किए जाने वाले हैं। इस दिन को दान एकादशी के रूप में भी पहचाना जाता है। इस दिन पूजा और दान का विशेष महत्व है।

उज्जैन में डोल ग्यारस के मौके पर जहां नगर कोतवाल बाबा काल भैरव की सवारी निकाली जाएगी। वहीं शहर के अलग-अलग हिस्सों से डोल और झांकियां हरसिद्धि मंदिर पहुंचेंगे। इंदौर में भी भव्य चल समारोह निकलेगा। वहीं देवास के हाटपिपल्या में डेढ़ सौ साल पुरानी परंपरा निभाई जाएगी।

इंदौर में निकलेगा भव्य समारोह

आज इंदौर में अलग-अलग हिस्से से धार्मिक चल समारोह निकाले जाएंगे। इसके लिए राजवाड़ा और आसपास के क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बदली जाएगी। पुलिस ने लोगों से पहले ही भीड़ वाले क्षेत्रों में वाहन न लाने और वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करने के अपील की है।

एक नहीं कई समारोह

इंदौर में एक नहीं बल्कि कई चल समारोह निकलने वाले हैं। लगभग तीन दशक से सिद्धेश्वर हनुमान व्यायाम शाला से डोल निकाले जा रहे हैं। यह शाम 6 बजे बाबूलाल नगर से निकलेंगे। इसमें श्री कृष्ण और राधा की झांकी के साथ अखाड़े मौजूद रहेंगे। बालिकाओं को शस्त्र कला का प्रदर्शन करते हुए भी देखा जाएगा। इसके अलावा शाम 7 बजे जूना रिसाला से लोधी समाज का डोल निकलेगा। प्रजापति समाज शाम 6 बजे कुम्हारखाड़ी मेन रोड पर मौजूद प्रजापति धर्मशाला से चल समारोह निकलेगा।

इसी तरह से कोष्टी समाज शाम 7 बजे राजकुमार मिल की श्री राम मंदिर धर्मशाला से डोल निकलेगा। इसमें बाबा नीम करौली की झांकी रहने वाली है। यात्रा राजवाड़ा होते हुए निकलेगी। वहीं देवांग कोष्टी समाज शाम 7 बजे परदेशीपुरा से डोल निकालेगा। 132 साल से यह परंपरा में निभाई जा रही है।

उज्जैन में सवारी और डोल

उज्जैन में आज सबसे खास नगर कोतवाल और बाबा महाकाल के सेनापति भगवान काल भैरव की सवारी रहती है। शाम 4 बजे मंदिर से राजसी अंदाज में सवारी नगर भ्रमण पर निकलती है। इसके अलावा शहर की अलग-अलग क्षेत्र से फूल डोल चल समारोह और झांकियां निकाले जाते हैं। इसमें मक्सी रोड के किशनपुरा से निकलने वाला बैरवा समाज का चल समारोह काफी आकर्षक होता है। इसके अलावा अन्य अखाड़ों द्वारा 30 से ज्यादा झांकिया और डोल निकाले जाते हैं।

देवास में 150 साल पुरानी परंपरा

मध्य प्रदेश के देवास जिले में डोल ग्यारस पर डेढ़ सौ साल पुरानी परंपरा देखने को मिलेगी। यहां के हाटपिपल्या में भगवान नरसिंह के मंदिर हैं। आज मंदिर से भगवान की प्रतिमा नगर भ्रमण पर निकलती है। ढोल ताशे और पुलिस बैंड के साथ यह सवारी चासिया मार्ग स्थित भमोरी नदी के नरसिंह घाट जाती है। यहां पूजा के पश्चात भगवान को प्रशासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। इसके बाद मुख्य पुजारी पाषाण की प्रतिमा को नदी के पानी में तीन बार उतारते हैं।

जुड़ी है ये मान्यता

पाषाण की यह तकरीबन साढ़े 7 किलो वजनी प्रतिमा को नदी में उतारने के पीछे एक गहरी मान्यता है। परंपरा के मुताबिक प्रतिमा को तीन बार नदी में उतारा जाता है। इसके हर बार तैरने या डूबने को आने वाले वर्ष के संकेत के रूप में देखा जाता है। अगर प्रतिमा तीन बार तैरती है, तो पूरा साल सुख समृद्धि और खुशहाली से भरा हुआ माना जाता है। ये अच्छी फसल का संकेत भी है। वहीं अगर प्रतिमा दो बार तैरती है और एक बार डूबती है इसका मतलब है कि साल के 8 महीने अच्छे और 4 महीने सामान्य और थोड़े कठिन गुजरेंगे। वहीं प्रतिमा एक बार तैरती है और दो बात डूबती है तो साल के 4 महीने अच्छे और 8 महीने कठिन माने जाते हैं। प्रतिमा अगर तीनों बार डूब जाए तो इसे अशुभ संकेत कहा जाता है। इसे सूखे, अकाल और प्राकृतिक आपदा से जुड़ा हुआ माना जाता है।

भोपाल में भी निकलेगा जुलूस

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी डोल ग्यारस का जुलूस निकलेगा। इसे देखते हुए मंगलवार दोपहर 1 बजे से ट्रैफिक डायवर्जन शुरू कर दिया जाएगा। चौक बाजार से खटलापुरा मंदिर तक जुलूस जिन मार्गों से गुजरेगा। वहां ट्रैफिक डायवर्ट रहेगा। भारत टॉकीज से न्यू मार्केट और रेलवे स्टेशन जाने वाले लोगों को वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करना होगा।

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