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PM Modi बोले- हजारों वर्षों के अनुभव समेटे भारत एक बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, पंडित दीनदयाल उपाध्याय को किया याद

भारतीय जनता पार्टी के सेवा संकल्प अभियान के तहत आज प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी से वडनगर जाने वाले दल के साथ संवाद किया उन्होंने कहा कल मुझे वडनगर से जो लोग सेवा यात्री निकले हैं, उन सभी टोली के साथ संवाद करने का मौका मिला और आज मेरी काशी से जो टोली निकली है और मेरे गांव जा रही है, उन सेवा यात्रियों से बात करने का मौका मिला। आप सभी बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेकर, मैं गंगा का आशीर्वाद लेकर वडनगर में चिर पुरातन हाटकेश्वर महादेव के दर्शन करने जा रहे हैं और साथ-साथ पूरे रास्ते सेवा कार्य भी कर रहे हैं, निश्चित ही ये बहुत बड़े सौभाग्य की बात है।

वडनगर ने मुझे जीवन के संस्कार दिए और काशी ने मेरे संस्कारों में सेवा के अनगिनत रंग भरे हैं। मुझे संतोष है कि आप सभी युवा साथी भी इस यात्रा को अनेक सेवा के रंगों से सराबोर कर रहे हैं। ये रंग देशभक्ति के हैं, ये रंग सेवा के हैं, ये रंग संस्कारों के हैं, ये रंग संकल्प के हैं… ये विकसित भारत बनाकर ही रुकेंगे। सेवा संकल्प यात्रा में इस भाव का प्रकटीकरण है और ये भाव हर तरफ दिखता है।

पीएम मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय उपाध्याय को दी श्रद्धांजलि 

मोदी ने कहा आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय उपाध्याय की जन्म-जयंती भी है। पंडित दीनदयाल जी चरैवति-चरैवति-चरैवति के मंत्र का हमें हमेशा संदेश देते रहे, अपने जीवन से देते रहे। वे स्वयं अविरत यात्री थे। एक सेवा यात्री के रूप में निरंतर चलते रहना ही हमारा ध्येय है और इसमें हमें बहुत बड़ी प्रेरणा पंडित दीनदयाल उपाध्याय से मिलती है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय राजनीति के उन महान व्यक्तित्वों में रहे हैं, जिन्होंने भारत को विदेशी चश्में से देखने के बजाय स्वदेशी विजन दिया है। उन्होंने सेवा के संस्कार को नए सिरे से गढ़ा। उनके एकात्म मानव दर्शन में सेवा का वो स्वरूप है जिसे बीजेपी के हर कार्यकर्ता, बीजेपी की हर सरकार को हमेशा प्रेरित करता है।

मोदी ने याद दिलाये पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दिए सात सूत्र

पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने हमें समाज के कर्तव्यों को निभाने के लिए सात सूत्र दिए हैं… आज के पुण्य दिन वो सात सूत्रों का स्मरण हर भाजपा कार्यकर्ता को नई ऊर्जा से भर देता है। ये सात सूत्र हैं… सेवाभाव, संतुलन, संयम, समन्वयक, सकारात्मकता, संवेदना और संवाद। मोदी ने कहा मेरे अपने जीवन में सेवा यात्राओं की बहुत बड़ी भूमिका रही है। देश का ऐसा कोई जिला नहीं है जहां मुझे जाने का सौभाग्य न मिला हो। ऐसे अनगिनत जिले हैं जहां मुझे रात को रुकने का मौका मिला है।

हमें विकसित भारत बनाना है, हमें आत्मनिर्भर भारत बनाना है

प्रधानमंत्री ने कहा हर यात्रा और यात्रा में मिला हुआ हर अनुभव एक गुरु की तरह आज भी मेरा मार्गदर्शन कर रहा है। इन यात्राओं ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। हमारा भारत भी आज एक नई यात्रा पर है। एक बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। हमें विकसित भारत बनाना है और समय जितना भी हमारा साथ है, पल-पल हमें विकसित भारत के सपने को जीना है, उसे साकार करना है, हमें आत्मनिर्भर भारत बनाना है। चुनौतियां आएंगी और चुनौतियों को चुनौती देने का संस्कार लेकर हम चले हैं।

 

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