Wed. Oct 7th, 2026

प्रसूताओं की मौत मामले में डॉक्टरों को क्लीन चिट परिजनों ने उठाए सवाल, कहा- दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में मई में हुई प्रसूताओं की मौत के मामले में पीड़ित परिजन आज जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन व सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए ज्ञापन सौंपा।पीड़ितों का आरोप है कि जांच के नाम पर केवल आश्वासन का खेल खेला जा रहा है और दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें वापस जिम्मेदारियों पर बहाल किया जा रहा है।मृतक प्रसूता पायल की ननद टीना ने रोष जताते हुए कहा कि सर्किट हाउस में जब जनसुनवाई के दौरान हमें 5 लाख रुपए की सहायता का आश्वासन दिया गया, तब बच्चे के 18 साल तक लालन-पालन और नौकरी की बात भी कही गई थी।  लेकिन आज स्थिति यह है कि न तो बच्चों के लिए दूध-पाउडर की सुविधा है और न ही भविष्य की कोई योजना। हमें केवल 5 लाख रुपए नहीं चाहिए, इससे बिना मां-बाप के बच्चों का भविष्य नहीं सुधर सकता।प्रसूता के पति मोहम्मद आशु ने कहा कि यह कोई एक मौत का मामला नहीं, बल्कि सीधे-सीधे हत्या का मामला है।

दोषियों के खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं किया जा रहा

उन्होंने सवाल उठाया कि मामले में डॉक्टरों को बेकसूर बताकर वापस जॉइनिंग दे दी है, तो फिर जिस लोकल परचेज या दवा कंपनी की दवाईयों के कारण यह हादसा हुआ है, उस पर मुकदमा क्यों नहीं किया जा रहा।

एक तरफ तो 18 साल तक बच्चों की जिम्मेदारी उठाने के दावे किए गए थे, वहीं दूसरी तरफ आज हमें कलेक्ट्रेट से लेकर सीएमएचओ दफ्तर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।हर जगह से बस यही जवाब मिलता है कि कलेक्ट्रेट से फाइल या आदेश आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े हॉस्पिटल में प्रसूताऑ की मौत व किडनी फेल्योर के करीब 5 महीने पुराने मामले में निलंबित तीन डॉक्टरों को राहत मिली है। मामले में जांच कमेटियों ने डॉक्टर्स की लापरवाही नहीं माना है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तीनों निलंबित डॉक्टर को तुरंत बहाल किया है। मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट की संयुक्त शासन सचिव डॉ. ज्योति चौहान ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

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