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करोड़ों का धान स्कूटर पर, सिस्टम की आंखों में धूल झोंक घोटाले का रिकॉर्ड बनाते रहे मिलर्स, दीपक सक्सेना की सख्ती से सामने आया घोटाले का सच

मध्यप्रदेश में एक बार फिर प्रशासनिक ईमानदारी ने भ्रष्टाचार को बेनकाब किया है। जबलपुर के कलेक्टर दीपक सक्सेना ने धान के परिवहन में गड़बड़ी का ऐसा खुलासा किया है, जो न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीरो टॉलरेंस नीति के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता का प्रमाण भी है। यहां धान की करोड़ों की खेप ट्रकों से नहीं, बल्कि कागज़ों में स्कूटर और ऑटो पर लादी गई। जांच में खुलासा हुआ है कि जिले के कई राइस मिलर्स ने धान के परिवहन के लिए जो वाहन नंबर दर्ज कराए, उनमें से कई या तो स्कूटर निकले या फिर ऐसे वाहन जिनमें एक बोरी अनाज ढोना भी मुश्किल है— लेकिन कागजों में इनसे 40 क्विंटल से ज्यादा धान ढो दिया गया। इस फर्जीवाड़े को कड़ी जांच से पकड़ते हुए कलेक्टर दीपक सक्सेना ने करीब 40 मिलर्स को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है। तीन चरणों में की गई जांच में खुला झूठ का पुलिंदा, सबसे पहले वाहन नंबरों की जांच में खुलासा हुआ कि कई नंबर स्कूटर या छोटे वाहनों के हैं। फिर वाहनों की वास्तविक क्षमता और दर्ज धान की मात्रा का मिलान किया गया तो गड़बडिय़ां उजागर हुईं। और तो और 20 से अधिक मिलर्स ने एक-एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के धान में फर्जीवाड़ा किया। कलेक्टर जबलपुर दीपक सक्सेना की यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का प्रभावशाली उदाहरण है, जिसमें ईमानदार आईएएस अधिकारी व्यवस्था की सफाई में लगे हैं। इससे पहले भी दीपक सक्सेना ने शिक्षा माफिया के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था और अब खाद्यान्न के क्षेत्र में हुए गड़बड़झाले को पकड़कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि, भ्रष्टाचार चाहे कहीं भी छुपा हो कितना भी बड़ा हो अगर नीति सख्त और इरादा साफ हो, तो उसे उजागर किया जा सकता है। जबलपुर का यह मामला चेतावनी है उन लोगों के लिए, जो सोचते हैं कि कागज़ों में घालमेल से वे सरकारी योजनाओं को पतीला लगा सकते हैं। लेकिन यह उम्मीद का उदाहरण भी है कि जब प्रशासन, नीति और नेतृत्व एक दिशा में ईमानदारी से काम करें, तो भ्रष्टाचार कितनी भी चालाकी से क्यों न छुपा हो, उसे उजागर किया जा सकता है। इस कड़वी खबर का लब्बोलुआब यह है कि यह घोटाला सिर्फ एक लापरवाही या गलती नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर फैला गहरी सड़ांध का खुलासा है। जब तक दीपक सक्सेना जैसे अधिकारियों की साहसिक कार्रवाई से ऐसे मामलों पर रोशनी नहीं डाली जाएगी, तब तक भ्रष्टाचार को खत्म कर पाना असंभव है ऐसा माना जाए तो चौंकिएगा मत।

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