ईरान बोला- होर्मुज अब पहले जैसा नहीं रहेगा इसकी देखरेख हम अपने तरीके से करेंगे, अमेरिका पर भरोसा नहीं
ईरान के संसद अध्यक्ष और अमेरिका-ईरान बातचीत में अहम वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट अब युद्ध से पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा। उन्होंने कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग की देखरेख आगे ईरान अपने तरीके से करेगा, हालांकि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन जारी रहेगा।
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी प्रेस टीवी के मुताबिक, स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ तकनीकी बातचीत के पहले दौर के बाद गालिबाफ ने दोहराया कि ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं है। गालीबाफ ने कहा,
दूसरी ओर, ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है। हालांकि, ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि परमाणु मुद्दे पर कोई नई सहमति नहीं बनी है। वहीं, स्विट्जरलैंड में बातचीत के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल पर कुछ पाबंदियों में 60 दिन की ढील दी है।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स…
1. PAK पीएम बोले- अमेरिका-ईरान वार्ता सफल: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत सकारात्मक रही। दोनों पक्ष 60 दिन के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने, हाई लेवल कमेटी बनाने और तकनीकी स्तर की वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए।
2. अमेरिका ने ईरान को 60 दिन तेल बेचने की छूट दी: ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन और बिक्री पर 21 अगस्त तक के लिए प्रतिबंधों में ढील दे दी। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही जारी रखने पर ईरानी सहमति के बाद लिया गया।
3. ईरान ने कहा- बातचीत के बीच भी सेना पूरी तरह अलर्ट: ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी गदीर नेजामी ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहने के बावजूद सेना की तैयारियों में कोई कमी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है।
4. होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी: करीब 20 लाख बैरल तेल लेकर दो टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। यह टैंकर किस देश के हैं इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई हैं। हालांकि, जहाजों की संख्या अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से काफी कम है।
5. स्विट्जरलैंड वार्ता के बाद गालिबाफ और अराघची ओमान रवाना: ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अमेरिका के साथ बातचीत के बाद ओमान पहुंचे हैं। वहां होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन पर चर्चा होगी।
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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने युद्ध के दौरान यूरोपीय देशों के रुख की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अपनाई गई नीतियों की वजह से यूरोपीय देशों का असर कम हो गया है।
अल जजीरा के मुताबिक बघई ने कहा कि यूरोपीय देशों के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी इमेज और स्थिति मजबूत होने के बजाय और कमजोर होगी।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष अपने वादों को पूरी तरह और सही तरीके से लागू करें।
उन्होंने एक्स पर लिखा, “बातचीत तभी असरदार होगी, जब तय जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। इस दिशा में प्रगति का आकलन भी इसी आधार पर होगा कि दोनों पक्ष अपने वादे कितनी ईमानदारी से निभाते हैं।”
तकनीकी बातचीत के बाद आगे की वार्ता के लिए 4 टास्क ग्रुप बनाए जाएंगे
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत पूरी हो गई है। अब आगे की बातचीत के लिए चार अलग-अलग टास्क ग्रुप बनाए जाएंगे। इन ग्रुप्स का मकसद अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौते का रास्ता तैयार करना है।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने बताया कि इन ग्रुप्स में प्रतिबंध हटाने, परमाणु कार्यक्रम, देश के रीकंस्ट्रक्शन-आर्थिक विकास, और समझौते के पालन-निगरानी जैसे मुद्दों पर काम किया जाएगा।
स्विट्जरलैंड में बातचीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता या सही तरीके से व्यवहार नहीं करता, तो वह फिर से कार्रवाई करने को तैयार हैं। अगर ईरान अपने वादो पर कायम नहीं रहता, तो मुझे जो करना होगा, मैं करूंगा।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान के पास उन पर दबाव बनाने की कोई ताकत नहीं है। हालिया घटनाओं के बाद ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो चुकी है।
साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए अगर लंबे समय तक सैन्य कार्रवाई करनी पड़े और उससे वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा भी पैदा हो, तब भी यह कदम ज्यादा महत्वपूर्ण है।
ईरान बोला- अमेरिका से बातचीत संघर्ष का ही हिस्सा
ईरान के संसद अध्यक्ष बाघेर गालीबाफ ने बातचीत को संघर्ष का ही एक हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि युद्ध के मैदान में मिली सफलता तब तक स्थायी राजनीतिक और कानूनी उपलब्धि नहीं बनती, जब तक उसे कूटनीति के जरिए आगे नहीं बढ़ाया जाए।
गालीबाफ ने कहा कि बातचीत भी लड़ाई का एक तरीका है और संघर्ष को आगे बढ़ाने का जरिया है। ईरान वार्ता को कमजोरी नहीं, बल्कि अपने हितों की रक्षा के लिए अपनाई गई रणनीति के रूप में देखता है।
ईरान बोला- होर्मुज स्ट्रेट अब पहले जैसा नहीं रहेगा
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट अब युद्ध से पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा। उन्होंने कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग का प्रबंधन आगे ईरान अपने तरीके से करेगा, हालांकि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन जारी रहेगा।
स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ तकनीकी वार्ता के पहले दौर के बाद गालिबाफ ने दोहराया कि ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं है। गालीबाफ ने कहा, “हमने कभी अमेरिकियों पर भरोसा नहीं किया, आज भी नहीं करते और भविष्य में भी सावधान रहना ही समझदारी होगी।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष बाघेर गालिबाफ आधिकारिक दौरे पर ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचे। ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अलबुसैदी ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
ओमान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच ओमान-ईरान संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। साथ ही ईरान-अमेरिका MoU और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर भी बातचीत हुई।
बैठक में दोनों देशों ने क्षेत्र में तनाव कम करने, शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और बिना शुल्क आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ईरान की सरकारी मीडिया को दिए इंटरव्यू में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए MoU के बाद ईरानी फ्रीज्ड फंड जारी होना देश के लिए बड़ी कामयाबी है।
उन्होंने बताया कि MoU के आर्टिकल 11 के तहत 6-6 अरब डॉलर की दो अलग-अलग रकम ईरान को मिलनी है। इसके लिए शुरुआती तैयारी कतर दौरे के दौरान हो गई थी, जबकि अंतिम मंजूरी स्विट्जरलैंड में हुई।
गालिबाफ ने कहा कि आर्टिकल 10 के तहत तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पाद, बैंकिंग, बीमा और परिवहन से जुड़े प्रतिबंधों में भी अंतिम समझौता होने तक राहत दी गई है।
उन्होंने इन दोनों फैसलों को MoU का पहला बड़ा फायदा बताते हुए कहा कि ईरान इसे समझौते से मिली शुरुआती जीत के तौर पर देख रहा है।
