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बादलों की आवाजाही, आज 19 जिलों में बूंदाबांदी के आसार, इसी सप्ताह से मानसून की विदाईc

दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा राजस्थान और पंजाब के कई हिस्सों से आगे बढ़ते हुए मध्य प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र तक पहुंच चुकी है, ऐसे में इस हफ्ते से उज्जैन और ग्वालियर संभाग से मानसून के विदा होने का सिलसिला शुरू होने का अनुमान है। इसके बाद धीरे-धीरे इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम और सागर संभाग से मानसून लौटेगा।

मौसम विभाग की मानें तो फिलहाल भारी बारिश की कहीं भी संभावना नहीं है लेकिन वातावरण में नमी और कमजोर मौसम प्रणालियों के असर से  1 और 2 अक्टूबर को कुछ ही जिलों में कहीं-कहीं बूंदाबांदी हो सकती है, 3 अक्टूबर को बादल छा सकते हैं, बारिश की संभावना कम है।

आज 19 जिलों में बूंदाबांदी की संभावना

मौसम विज्ञान केंद्र, भोपाल के मुताबिक, बुधवार को बैतूल, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना में बादल छाने के साथ कहीं-कहीं बूंदाबांदी की स्थिति बन सकती है।

इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच में धूप खिलेगी। आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, सागर, दमोह, नरसिंहपुर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी धूप छावं देखने को मिल सकती है।

क्या कहता है मौसम विभाग का पूर्वानुमान

मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की रेखा अब गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा, नलिया से होकर गुजर रही है। पश्चिमी विक्षोभ, एक चक्रवाती परिसंचरण के रूप में माध्य समुद्र तल से 3.1 से 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच उत्तर हरियाणा और उसके आसपास के क्षेत्र में जिसके साथ मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल की पछुआ हवाओं में एक ट्रफ औसत समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर अवस्थित है। ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण, माध्य समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना हुआ है।

1 जून से 29 सितंबर 2026 तक कहां-कितनी हुई बारिश

1 जून से 29 सितंबर 2026 तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 4% यानि 1.5 इंच बारिश कम हुई है। प्रदेश में अबतक 35.7 इंच बारिश ( 95.9% या 908 MM) रिकॉर्ड हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 37.2 इंच (947.5 MM) होनी चाहिए थी।

  • पूर्वी मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां 4% ज्यादा और पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 12% कम पानी गिरा है।
  • बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 3% से 21% तक कम बारिश हुई है।
  • पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है।
  • अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

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