G7 समिट में PM मोदी ने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा, डोनाल्ड ट्रम्प की मौजूदगी में कही ये बड़ी बात
फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G7 Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा वैश्विक मंच पर उठाया है। दरअसल हाई लेवल वर्किंग सेशन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार से दुनिया के देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी मौजूद थे और पीएम मोदी के पास ही बैठे नजर आए।
दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में हाल के संघर्षों का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस तनाव में कई देशों के नागरिकों के साथ भारतीयों ने भी अपनी जान गंवाई है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना आज की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में चिंता बनी हुई है।
कई देशों के नेताओं से हुई मुलाकात
वहीं G7 Summit के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया। दरअसल उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, केन्या, मिस्र, जापान और दक्षिण कोरिया के नेताओं के साथ अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। वहीं यूएई के राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक में दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए वहां की सरकार द्वारा किए जा रहे सहयोग की सराहना भी की।
इसके साथ ही केन्या के राष्ट्रपति के साथ बातचीत में दोनों देशों के बीच विकास और सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा हुई। वहीं जापान और दक्षिण कोरिया के नेताओं के साथ आर्थिक साझेदारी, निवेश और नई तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बात हुई। मिस्र के राष्ट्रपति के साथ बैठक में दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और भविष्य की साझेदारी को लेकर चर्चा हुई।
जानिए अपने संबोधन में PM मोदी ने क्या कहा?
दरअसल G7 Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात भी चर्चा का विषय रही है। दोनों नेताओं ने कार्यक्रम के दौरान एक-दूसरे से बातचीत की और बाद में द्विपक्षीय बैठक का कार्यक्रम भी तय किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भरोसे को अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत बताया है। दरअसल उन्होंने कहा है कि आज दुनिया में संसाधनों की नहीं, बल्कि भरोसे की कमी है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास तभी सफल होता है जब वह लोगों की जरूरतों और उम्मीदों से जुड़ा हो। पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ के देशों की अपेक्षाओं का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें केवल समर्थन नहीं बल्कि बराबरी की साझेदारी चाहिए।
