कांग्रेस विधानमंडल दल नेता पद पर अब नहीं सधेगा जातीय संतुलन
देहरादून। प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नए नेता के चयन में अब जातीय संतुलन शायद ही साधा जा सके। अलबत्ता क्षेत्रीय संतुलन को लेकर पुराने फार्मूले को ही दोबारा दोहराया जा सकता है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का चयन जल्द होने की उम्मीद है।
डा इंदिरा हृदयेश का बीती 13 जून को निधन होने से प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता का पद रिक्त हो गया है। डा हृदयेश को नेता प्रतिपक्ष बनाकर पार्टी प्रदेश के भीतर जातीय और क्षेत्रीय दोनों ही संतुलन को बखूबी साधने में सफल रही थी। इंदिरा के नहीं रहने के बाद पार्टी के सामने ये दिक्कत खड़ी हो गई। अभी तक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष के रूप में डा हृदयेश की जोड़ी इस संतुलन में अहम भूमिका निभा रही थी।
इंदिरा के निधन से कांग्रेस विधानमंडल में सशक्त ब्राहमण चेहरा चला गया है। खास बात ये है कि मौजूदा 10 विधायकों में से पार्टी के पास अब एक भी ब्राहमण विधायक नहीं है। ऐसे में जातीय संतुलन के स्थान पर कांग्रेस अब क्षेत्रीय संतुलन और अन्य समीकरणों को साधकर काम चलाने की तैयारी में है। दरअसल डा हृदयेश के निधन के चलते शोक में डूबी पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष के चयन पर जोर नहीं दिया था। अब तकरीबन 13 दिन बाद पार्टी ने इस संबंध में विचार-विमर्श प्रारंभ कर दिया है।
कांग्रेस विधानमंडल दल नेता कौन बनेगा, इस बारे में फैसला पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को करना है। इस पद के स्वाभाविक दावेदारों में करन माहरा भी हैं। करन माहरा वर्तमान में उप नेता प्रतिपक्ष हैं। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस महासचिव हरीश रावत के प्रबल समर्थकों में माना जाता है। हालांकि वरिष्ठता के लिहाज से मौजूदा कुछ विधायक करन माहरा पर भारी पड़ते हैं। इनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल भी शामिल हैं। बीते दिनों करन माहरा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह से उनके देहरादून स्थित आवास पर मिल चुके हैं।
सूत्रों की मानें तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी के भीतर भी करन के नाम को लेकर तकरीबन सहमति है। नेता प्रतिपक्ष के चयन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के रुख को भी अहम माना जा रहा है। पार्टी हाईकमान भी इस पद पर उनसे मशविरा लेगा। अन्य समीकरणों पर गौर करने की सूरत में नेता प्रतिपक्ष के रूप में पार्टी नए चेहरे पर भी दांव खेल सकती है। इस संबंध में संपर्क करने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का चयन केंद्रीय नेतृत्व को करना है। नेतृत्व जो भी फैसला लेगा, उसका पालन किया जाएगा।
