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सरकारी खरीद से मडुवा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

बागेश्वर। आम बजट में वित्त मंत्री के मोटे अनाज को बढ़ावा देने के फैसले से जिले में भी मोटे अनाज की पैदावार बढ़ने की उम्मीद है। बजट से पहले ही सरकार की ओर से मडुवा की सरकारी खरीद का किसानों को जो तोहफा दिया गया था, उसका किसानों ने भरपूर लाभ उठाया। जिले सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों से 35.78 रुपये प्रति किलो की दर से मडुवा खरीदा गया। 31 जनवरी तक सहकारी समितियों ने 346.76 क्विंटल मडुवा खरीदा। बजट के बाद अन्य मोटे अनाजों की पैदावार को लेकर भी किसानों के जागरूक होने की उम्मीद है।

जिले में पहले मडुवा, झंगोरा, रामदाना, बाजारा, कौंणी (फॉक्सटेल मिलट) आदि की बहुतायत में पैदावार होती थी। बाद के वर्षों में धान और गेहूं ने मुख्य फसल का स्थान ले लिया और मोटे अनाजों का उत्पादन हाशिये पर चला गया था। वर्तमान में जिले की कुल फसल में मात्र 13.84 प्रतिशत पैदावार ही मोटे अनाज की है। इनमें मडुवा प्रमुख है जबकि झंगोरा और रामदाना का उत्पादन कपकोट के कुछ दूरस्थ इलाकों में किया जाता है। केंद्र सरकार की मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की पहल फिर से रंग लाने लगी है। मुख्य कृषि अधिकारी एसएस वर्मा बताते हैं कि मडुवे का अच्छा दाम मिलने के बाद किसान मोटे अनाज के उत्पादन को लेकर उत्साहित हैं। आने वाले समय में निश्चित तौर पर जिले में मोटे अनाजों की पैदावार बढ़ेगी।

मोटे अनाज पौष्टिक होने के साथ ही कम लागत में पैदा हो जाते हैं। जहां धान उत्पादन में सिंचाई की जरुरत पड़ती है, वहीं मोटे अनाज असिंचित जमीन में पैदा हो जाते हैं और इनमें दवा व खाद की भी अधिक जरूरत नहीं होती है। जिले में अधिकतर जमीन असिंचित है। सरकार ने किसानों को मडुवे के गेहूं से कहीं अधिक दाम देकर मिलट की पैदावार बढ़ाने की अच्छी पहल की है। अगर जिले के किसान मोटे अनाज की पैदावार बढ़ाएं तो काफी लाभदायक रहेगा।
-डॉ. केके पांडेय, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर

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