Sat. Aug 22nd, 2026

हाथी कॉरिडोर में बसावट से बढ़ रहा मानव वन्यजीव संघर्ष : त्यागी

तमिलनाडु के पूर्व पीसीसीएफ प्रवीण चंद त्यागी ने कहा कि हाथी गलियारों में बसावट होने से मानव वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। हाथी आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। जिससे मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही हैं।

केंद्र सरकार के निर्देश पर हाथियों के सिमटते गलियारों को लेकर तमिलनाडु के पूर्व पीसीसीएफ के नेतृत्व में रिटायर्ड वन अधिकारियों और वैज्ञानिकों की एक टीम प्रदेश में मौजूद हाथी गलियारे का निरीक्षण कर रही है। सोमवार मोतीचूर रेंज कार्यालय में अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ बैठक के बाद पूर्व पीसीसीएफ प्रवीण चंद त्यागी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य को जंगली हाथियों की शरणस्थली भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि 70-80 के दशक में यमुना नदी किनारे तिमली रेंज से लेकर शारदा नदी से सटे टनकपुर तक जंगली गजराजों के कई गलियारे हुआ करते थे।

अब इन गलियारों में कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए हैं। विकास के नाम पर आज यह गलियारे सिमटते जा रहे हैं, जो कि चिंता का विषय है। कई स्थानों पर हाथियों के गलियारे खत्म होने के कारण मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। कई बार हाथियों का झुंड आबादी क्षेत्रों की ओर से रुख करते हैं। वहां लोगों के घराें, चहारदीवारी और फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।

पार्क निदेशक साकेत बडोला ने बताया कि शिवालिक एलीफेंट रिजर्व हाथियों के संरक्षण पर केंद्रित है। जिसमें राजाजी, कार्बेट के अलावा लैंसडौन वन प्रभाग, देहरादून वन प्रभाग, रामनगर वन प्रभाग आते हैं। उन्होंने बताया कि यह टीम शिवालिक एलीफेंट रिजर्व के पूरे क्षेत्र में जाकर वहां के वनाधिकारियों के साथ बैठक करेगी। इस अवसर पर वन्यजीव प्रतिपालक प्रशांत हिंदवाण, वन्यजीव प्रतिपालक आलोकी, पशुचिकित्सक राकेश नौटियाल, रेंजर महेश सेमवाल, रेंजर शीतल, रेंजर गोविंद पंवार, रेंजर रामगढ, जयपाल रावत, रेंजर बेरीवाड़ा, एसएस रावत, रेंजर चीला शैलेश घिल्डियाल आदि उपस्थित रहे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed