रतलाम कलेक्ट्रेट में मौन धरने पर बैठे ग्रामीण, कलेक्टर ने समस्याएं सुन दिया समाधान का आश्वासन
रतलाम जिले के पिपलौदा तहसील के तकरीबन 4 से 5 गांव अपनी मूलभूत सुविधाओं और समस्या के निराकरण की मांग को लेकर कलेक्टर पहुंचे। इन ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट ऑफिस में मौन धरना दिया। उनकी समस्या को सुनने के लिए अपर कलेक्टर समेत अन्य अधिकारी आए लेकिन ग्रामीण इस बात पर पड़े हुए थे कि उन्हें कलेक्टर से मिलना है।
इसके बाद कलेक्टर अजय कटेसरिया मौके पर पहुंचे उन्होंने लोगों की समस्या से नहीं और ज्ञापन लेकर चार-पांच लोगों को बात करने के लिए अपने चेंबर में बुलाया। इस बीच भीड़ में से एक व्यक्ति ने कहा कि अंदर क्या बात करना है जो करना है सभी के सामने करें। इस पर कलेक्टर को नाराजगी जताते हुए देखा गया
क्या है ग्रामीणों की समस्या
कलेक्टर के बोलने के बाद जिला पंचायत सदस्य डीपी धाकड़ सहित 5 से 6 ग्रामीण उनसे चेंबर में मिलने के लिए पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि उमेदपुरा, आंबा, नांदलेटा, गुडरखेड़ा के आसपास बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार निवास कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली, पेयजल, सड़क और पुराने रास्ते को सुधारने की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने कहा कि बारिश में सड़कों पर कीचड़ हो जाता है, जिससे परेशानी उत्पन्न हो जाती है।
सड़कों की स्थिति खराब
ग्रामीणों ने सबलगढ़, नवाबगंज, कोटडा, गुडरखेड़ा, खेड़ावद, लालपुरा, भैसाडाबर से नई आबादी, चांचरी से भूरीघाट, कुंडला, बख़्तरपुर माताजी, आंबा, गढ़ीहाल, देवगढ़ से ऊंचाहेड़ा सहित कई गांवों की खराब स्थिति से कलेक्टर को अवगत कराया।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि देवघर धार्मिक स्थल तक जाने वाली जो सड़क है। उसकी स्थिति भी बहुत खराब है जिससे आने-जाने में परेशानी होती है। वही उनके क्षेत्र में स्कूलों की हालत खराब है और शिक्षकों की कमी भी देखने को मिल रही है। लालपुरा में बच्चों के बैठने के लिए व्यवस्था नहीं है। कई गांव में स्कूल भवन नहीं है जहां भवन हैं, वहां पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जो स्वास्थ्य केंद्र हैं वहां डॉक्टर और जरूरी सुविधाओं की कमी है। ग्रामीणों का कहना है कि जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।
कलेक्टर ने दिया समाधान का आश्वासन
कलेक्ट ने ग्रामीणों की सारी समस्याएं सुनीं और उनके समाधान के लिए जिला पंचायत सीईओ को नोडल अधिकारी बनाने की बात कही। उन्होंन 8 दिन में ग्रामीणों की समस्याओं को ध्यान में रखकर उनका समाधान करने का आश्वासन दिया। कलेक्टर से आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीण अपना धरना समाप्त कर मौके से चले गए।
